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किताबों का शीर्षक बदलकर बढ़ा रहे प्रिंट रेट
Updated Sun, 01 Apr 2018 10:53 PM IST
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मैनपुरी। निजी स्कूलों में किताबों के नाम पर अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। पुराने प्रिंट की किताबों को नया शीर्षक देकर प्रिंट रेट बढ़ाए जा रहे हैं। यही नहीं स्कूलों में ही पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। बड़े कमीशन की पुस्तकों में कुछ स्थानों पर बुकसेलरों से मिलकर स्कूल संचालक मोटा कमीशन खा रहे हैं।
वर्तमान समय में निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने का अभिभावकों के बीच क्रेज सा आ गया है। हर कोई अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम के सीबीएसई से संचालित स्कूलों में पढ़ाना चाहा रहा है। ऐसे में लोग निजी स्कूल संचालकों द्वारा की जा रही मनमानी का शिकार हो रहे हैं। मजबूरी में उनके द्वारा कराए जा रहे खर्च को सहन कर रहे हैं।
नवीन सत्र शुरू होते ही जनपद में निजी स्कूलों की बल्ले-बल्ले होने लगी है। स्कूलों में न केवल फीस बल्कि किताबों के नाम पर अभिभावकों को शोषण किया जा रहा है। मनमाने तरीके से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य अभिभावकों से किताबों के रुपये वसूल रहे हैं। कक्षा एक के बच्चे की किताबों की कीमत पांच हजार से आठ हजार तक है।
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वर्तमान समय में निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने का अभिभावकों के बीच क्रेज सा आ गया है। हर कोई अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम के सीबीएसई से संचालित स्कूलों में पढ़ाना चाहा रहा है। ऐसे में लोग निजी स्कूल संचालकों द्वारा की जा रही मनमानी का शिकार हो रहे हैं। मजबूरी में उनके द्वारा कराए जा रहे खर्च को सहन कर रहे हैं।
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नवीन सत्र शुरू होते ही जनपद में निजी स्कूलों की बल्ले-बल्ले होने लगी है। स्कूलों में न केवल फीस बल्कि किताबों के नाम पर अभिभावकों को शोषण किया जा रहा है। मनमाने तरीके से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य अभिभावकों से किताबों के रुपये वसूल रहे हैं। कक्षा एक के बच्चे की किताबों की कीमत पांच हजार से आठ हजार तक है।
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