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जिला अस्पताल में इंतजाम धड़ाम, तड़पते रहे झुलसे लोग
Updated Fri, 08 Dec 2017 08:28 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। हाईटेंशन लाइन के तारों की चपेट में आने से झुलसे सपेरा जाति के परिवार के साथ हुए हादसे ने शुक्रवार को जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की कलई खोलकर रख दी।
शुक्रवार दोपहर एक बजे राया से उपचार के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचे पीड़ितों को उतारने के लिए न कर्मचारी थे, न ही पर्याप्त स्ट्रेचर। परिजन ही झुलसे लोगों को गोद में उठाकर इमरजेंसी तक ले गए। यहां भी चिकित्सकीय सेवाएं बदहाल थीं। तपड़ रहे झुलसे बच्चे जमीन पर लेट गए, उन्हें पलंग तक पहुंचाने वाला कोई नहीं था।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली स्थिति तब सामने आई जब झुलसे लोगों को सफाईकर्मी चिकित्सकीय सेवा देते मिले। यहां चिकित्सक और फार्मासिस्ट के बजाय सफाई कर्मियों ने ड्रिप लगाई। हालांकि इमरजेंसी में इस दौरान मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ सजगता से काम कर रहे थे, लेकिन अन्य चिकित्सकों की मदद नहीं मिली। सफाईकर्मी ही उनकी सहायता करने में लगे थे। जिला अस्पताल में स्वीपरों द्वारा चिकित्सकीय कार्य करने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले उजागर हो चुके हैं।
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इस मामले में पता किया तो बताया गया कि ड्रिप मौजूद चिकित्सक ने लगाई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने उसे कनेक्ट करने में मदद अवश्य की है। सफाईकर्मी चिकित्सकीय कार्य के लिए अधिकृत नहीं हैं।
-डा.विमल कुमार गुप्ता, सीएमएस
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शुक्रवार दोपहर एक बजे राया से उपचार के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचे पीड़ितों को उतारने के लिए न कर्मचारी थे, न ही पर्याप्त स्ट्रेचर। परिजन ही झुलसे लोगों को गोद में उठाकर इमरजेंसी तक ले गए। यहां भी चिकित्सकीय सेवाएं बदहाल थीं। तपड़ रहे झुलसे बच्चे जमीन पर लेट गए, उन्हें पलंग तक पहुंचाने वाला कोई नहीं था।
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इससे भी अधिक चौंकाने वाली स्थिति तब सामने आई जब झुलसे लोगों को सफाईकर्मी चिकित्सकीय सेवा देते मिले। यहां चिकित्सक और फार्मासिस्ट के बजाय सफाई कर्मियों ने ड्रिप लगाई। हालांकि इमरजेंसी में इस दौरान मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ सजगता से काम कर रहे थे, लेकिन अन्य चिकित्सकों की मदद नहीं मिली। सफाईकर्मी ही उनकी सहायता करने में लगे थे। जिला अस्पताल में स्वीपरों द्वारा चिकित्सकीय कार्य करने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले उजागर हो चुके हैं।
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इस मामले में पता किया तो बताया गया कि ड्रिप मौजूद चिकित्सक ने लगाई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने उसे कनेक्ट करने में मदद अवश्य की है। सफाईकर्मी चिकित्सकीय कार्य के लिए अधिकृत नहीं हैं।
-डा.विमल कुमार गुप्ता, सीएमएस