{"_id":"59723a014f1c1b2e188b47a2","slug":"141500658177-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल से सम्मान, अनजाने में फिर भी अपमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल से सम्मान, अनजाने में फिर भी अपमान
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:37 PM IST
विज्ञापन
शिव भक्ति के संग देश भक्ति के रंग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। देश की आन, बान और शान राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान खतरे में है। नियमों के प्रति जागरूकता का अभाव ध्वज को अपमानित कर रहा है। आलम यह है कि लोग दिल से तो तिरंगे का सम्मान करते हैं, लेकिन हकीकत में वे जाने-अनजाने तिरंगे का अपमान कर बैठते हैं। इसे लेकर सरकारी प्रयास शून्य हैं।
आज राष्ट्र ध्वज अंगीकार दिवस है। यूं तो साल भर में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती पर तिरंगे को लेकर लोगों में उत्साह नजर आता है, लेकिन सही जानकारी का अभाव राष्ट्र ध्वज के प्रति सम्मान कम कर रहा है। संविधान के मुताबिक भारतीय झंडा संहिता 2002 तय की गई है, लेकिन लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है।
देखने में आता है कि कई बार तो विशेष अवसरों पर तिरंगा फहराया जाता है और लोग सम्मान प्रदर्शित करते हैं, लेकिन आयोजन के तुरंत बाद ही तिरंगे के सम्मान को भूलकर चल देते हैं। इसके साथ ही तिरंगा फहराने में भी संहिता के नियमों को दरकिनार कर दिया जाता है। संहिता के तहत ध्वज को किसी भी डंडे में डालकर फहराना गलत है, लेकिन जिले में इस नियम का पालन होता नजर नहीं आता है। महज ध्वज फहराकर आयोजन की खानापूर्ति की जाती है। राष्ट्रीय ध्चज को लेकर काम कर रही संस्था त्रमांत सेवा संस्थान के सचिव शिव कुमार कहते हैं कि ध्वज संहिता को लेकर सरकार को पहल करनी चाहिए। लोगों को राष्ट्र ध्वज सम्मान से जुड़े छोटे-छोटे नियमों की जानकारी देनी चाहिए। ताकि हर व्यक्ति के ध्वज के सम्मान को बरकरार रख सके।
विज्ञापन
दुकानों पर बिक्री है प्रतिबंधित
अक्सर दुकानदार ध्वज को आड़े-तिरछे तरीके से बिक्री के लिए दुकान पर लटकाते हैं। गाड़ी के आगे बोनट पर, स्टीकर चिपकाकर, प्लास्टिक के झंडों का प्रयोग करते हैं, लेकिन भारतीय झंडा संहिता के तहत यह प्रतिबंधित है।
वेबसाइट पर प्रदर्शित हो ध्वज
त्रमांत सेवा संस्थान की नेत्रा वर्मा कहती हैं कि डिजिटल इंडिया के दौर में हर विभाग की वेबसाइट है। हर विभाग की वेबसाइट पर ध्वज का लोगों और संहिता को प्रदर्शित करना चाहिए। ताकि लोग ध्वज के समान को समझ सकें।
विज्ञापन
आज राष्ट्र ध्वज अंगीकार दिवस है। यूं तो साल भर में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती पर तिरंगे को लेकर लोगों में उत्साह नजर आता है, लेकिन सही जानकारी का अभाव राष्ट्र ध्वज के प्रति सम्मान कम कर रहा है। संविधान के मुताबिक भारतीय झंडा संहिता 2002 तय की गई है, लेकिन लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है।
विज्ञापन
देखने में आता है कि कई बार तो विशेष अवसरों पर तिरंगा फहराया जाता है और लोग सम्मान प्रदर्शित करते हैं, लेकिन आयोजन के तुरंत बाद ही तिरंगे के सम्मान को भूलकर चल देते हैं। इसके साथ ही तिरंगा फहराने में भी संहिता के नियमों को दरकिनार कर दिया जाता है। संहिता के तहत ध्वज को किसी भी डंडे में डालकर फहराना गलत है, लेकिन जिले में इस नियम का पालन होता नजर नहीं आता है। महज ध्वज फहराकर आयोजन की खानापूर्ति की जाती है। राष्ट्रीय ध्चज को लेकर काम कर रही संस्था त्रमांत सेवा संस्थान के सचिव शिव कुमार कहते हैं कि ध्वज संहिता को लेकर सरकार को पहल करनी चाहिए। लोगों को राष्ट्र ध्वज सम्मान से जुड़े छोटे-छोटे नियमों की जानकारी देनी चाहिए। ताकि हर व्यक्ति के ध्वज के सम्मान को बरकरार रख सके।
विज्ञापन
दुकानों पर बिक्री है प्रतिबंधित
अक्सर दुकानदार ध्वज को आड़े-तिरछे तरीके से बिक्री के लिए दुकान पर लटकाते हैं। गाड़ी के आगे बोनट पर, स्टीकर चिपकाकर, प्लास्टिक के झंडों का प्रयोग करते हैं, लेकिन भारतीय झंडा संहिता के तहत यह प्रतिबंधित है।
वेबसाइट पर प्रदर्शित हो ध्वज
त्रमांत सेवा संस्थान की नेत्रा वर्मा कहती हैं कि डिजिटल इंडिया के दौर में हर विभाग की वेबसाइट है। हर विभाग की वेबसाइट पर ध्वज का लोगों और संहिता को प्रदर्शित करना चाहिए। ताकि लोग ध्वज के समान को समझ सकें।