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धनराशि मिली नहीं, मांग लिया हिसाब
Updated Fri, 23 Nov 2018 08:21 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। शिक्षक भर्ती घोटाले से जूझ रहे मथुरा जनपद के परिषदीय विद्यालयों में एक और नए घोटाले की नींव रख दी गई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की रंगाई-पुताई के लिए जो धनराशि प्रधान अध्यापकों को मिली नहीं, उसका हिसाब उन्हें देना है।
सितंबर माह में प्रदेश सरकार ने जनपद के 1952 परिषदीय विद्यालयों की रंगाई-पुताई सहित अन्य मरम्मत के काम के लिए 5.8 करोड़ रुपया जारी किया था। जिला मुख्यालय पर उक्त बजट आने के बाद इस राशि को विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुरूप आवंटित किया जाना है। लेकिन अब तक यह राशि परिषदीय विद्यालयों की प्रबंध समिति के खातों तक नहीं पहुंची है।
इससे निर्धारित राशि का उपयोग ही नहीं हो सका है। अब शिक्षा निदेशक बेसिक एसबी सिंह ने उक्त राशि का उपभोग प्रमाण पत्र मांग लिया है।
बैंक और शिक्षाधिकारियों की साठगांठ
बेसिक शिक्षा के तहत आने वाली विभिन्न ग्रांट का उपयोग जनपद में समय से नहीं किया जा रहा है। मुख्य शाखा शिक्षाधिकारियों की सहमति से उक्त धनराशि को क्षेत्रीय बैंक शाखाओं में कई माह बाद भेज रही हैं। इससे सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
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छात्र संख्या आवंटित बजट
0-15 15 हजार रुपये प्रति विद्यालय
15-100 25 हजार रुपये प्रति विद्यालय
101-250 50 हजार रुपये प्रति विद्यालय
251-1000 75 हजार रुपये प्रति विद्यालय
1000 से अधिक पर एक लाख रुपये
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सितंबर माह में प्रदेश सरकार ने जनपद के 1952 परिषदीय विद्यालयों की रंगाई-पुताई सहित अन्य मरम्मत के काम के लिए 5.8 करोड़ रुपया जारी किया था। जिला मुख्यालय पर उक्त बजट आने के बाद इस राशि को विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुरूप आवंटित किया जाना है। लेकिन अब तक यह राशि परिषदीय विद्यालयों की प्रबंध समिति के खातों तक नहीं पहुंची है।
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इससे निर्धारित राशि का उपयोग ही नहीं हो सका है। अब शिक्षा निदेशक बेसिक एसबी सिंह ने उक्त राशि का उपभोग प्रमाण पत्र मांग लिया है।
बैंक और शिक्षाधिकारियों की साठगांठ
बेसिक शिक्षा के तहत आने वाली विभिन्न ग्रांट का उपयोग जनपद में समय से नहीं किया जा रहा है। मुख्य शाखा शिक्षाधिकारियों की सहमति से उक्त धनराशि को क्षेत्रीय बैंक शाखाओं में कई माह बाद भेज रही हैं। इससे सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
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छात्र संख्या आवंटित बजट
0-15 15 हजार रुपये प्रति विद्यालय
15-100 25 हजार रुपये प्रति विद्यालय
101-250 50 हजार रुपये प्रति विद्यालय
251-1000 75 हजार रुपये प्रति विद्यालय
1000 से अधिक पर एक लाख रुपये