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अब कौन बनेगा भागीरथ, कैसे हर की पौड़ी में आएगी गंगा की जलधारा

Agra Bureauआगरा ब्यूरो Updated Wed, 18 Apr 2018 12:06 AM IST
चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह
चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह - फोटो : अमर उजाला
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सोरों(कासगंज)।
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ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थनगरी की हर की पौड़ी का स्थान इतना पवित्र है कि यहां विसर्जित की जाने वाली अस्थियां जलरूप में परिवर्तित हो जाती हैं। कभी भी विसर्जित अस्थियों के अवशेष यहां की हर की पैड़ी की सफाई में नहीं मिले। हर की पौड़ी के स्थान का बड़ा महत्व है।
भगवान वराह के प्राकट्य एवं मोक्ष लेने के समय से इस प्राचीन तीर्थनगरी का उदयकाल है। इस हर की पौड़ी में ही भगवान वराह ने हृण्याक्ष्य राक्षस का वध करके मोक्ष प्राप्त किया था। पहले बूढ़ी गंगा की धार से हर की पौड़ी में गंगा का जल पहुंचता था, लेकिन करीब 5 दशक पूर्व बूढ़ी गंगा का अस्तित्व धीमे धीमे मिटता चला गया। इसके बाद हर की पौड़ी में गोरहा नहर से 7 किलोमीटर लंबा बंबा बनाकर जलापूर्ति सुनिश्चित की जाने लगी। यह बंबा खुला हुआ है। जिससे तमाम कूड़ा कचरा भी हर की पौड़ी में पहुंचता है। सोरों तीर्थ के वाशिंदे, तीर्थ पुरोहित लगातार हर की पौड़ी में सीधी गंगा की जलधारा की मांग लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों किसी का इस ओर ध्यान नहीं है। पुराने जानकार लोग बताते हैं कि भौगोलिक परिवर्तनों व नरौरा डैम बनने के बाद से गंगा की धारा बूढ़ी गंगा की जगह लहरा होकर गुजरने लगी। दम तोड़ती बूढ़ी गंगा को जीवंत बनाने के लिए न पहले काम किया गया न अब कोई ध्यान देने को राजी है। बूढ़ी गंगा की खादर की सफाई और खुदाई का कार्य भी नहीं किया जाता। जिससे सोरों के कुमरऊआ से लेकर पटियाली तक बूढ़ी गंगा की तलहटी के ग्रामीणों को पानी के संकट का सामना करना पड़ता है।
सोरों में बड़ी संख्या में प्रतिदिन ही अपने परिवारीजनों की अस्थि विसर्जित करने के लिए दूसरे राज्यों से लोग पहुंचते हैं। हर की पौड़ी पर ही श्राद्ध व अन्य संस्कार भी किए जाते हैं। हर की पौड़ी में पानी की किल्लत भी आए दिन रहती है। ऐसी स्थिति में लोग गंगा की धारा से सीधे जलापूर्ति की मांग कर रहे हैं। यह मांग कब पूरी होगी, कौन भागीरथ बनेगा यह सवाल उलझा हुआ है।
- हर की पौड़ी में गंगा की धारा का पानी मिलना चाहिए। कई राज्यों के लोग यहां अस्थि विसर्जित करने के लिए पहुंचते हैं। लोगों की गंगा में असीम श्रद्धा है। गंगा इस क्षेत्र की पहचान है, लेकिन शासन प्रशासन का ध्यान नहीं है- राम कुमार शर्मा, तीर्थ पुरोहित
- सोरों का महत्व आदिकाल से है। देशभर के नामचीन राजा, महाराजाओं, संतों का आगमन इस पवित्र भूमि पर हुआ है। गंगा की यहां आराधना की गई है, लेकिन हर की पौड़ी को गंगा की अविरल धार का सीधा जल नहीं मिल पा रहा। जनप्रतिनिधि भी उनकी मांग की उपेक्षा कर रहे हैं- रामकिशोर त्रिगुनायत, तीर्थ पुरोहित
- सोरों की हर की पौड़ी पर प्रतिदिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्नान को आते हैं, लेकिन गोरहा नहर में पानी की सप्लाई बंद होने पर पौड़ी में पानी की कमी हो जाती है। जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कतें होतीं हैं। हर की पौड़ी में गंगा की धार का सीधा पानी लाया जाए- मदनमोहन दीक्षित, तीर्थ पुरोहित
- हर की पौड़ी में गंगाजल की अविरल धार आने से श्रद्धालुओं को अपार खुशी होगी। तीर्थनगरी के वाशिंदे काफी समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है- सुरेश चंद्र बडग़ैंया, तीर्थपुरोहित

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