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पूर्व पालिकाध्यक्ष पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
Updated Mon, 03 Sep 2018 10:37 PM IST
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पूर्व पालिकाध्यक्ष पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। पूर्व पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी पर धोखाधड़ी का मामला कोतवाली देहात में दर्ज किया गया है। पूर्व पालिकाध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति के व्यक्ति से जमीन को खरीदकर उस पर विद्यालय का भवन खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं जब मामला प्रकाश में आया तो न केवल तथ्यों को छुपाया बल्कि प्रशासन को गुमराह भी किया गया। जिस पर एसडीएम ने मामले की सुनवाई करते हुए धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए। जिस पर क्षेत्रीय लेखपाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सोमवार को तहसीलदार दुर्गेश यादव ने बताया कि वर्ष 2004 में पूर्व पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी ने प्रेमसिंह पुत्र भन्ना सिंह निवासी नगला हन्नी से 1.620 हेक्टेयर पट्टे की जमीन को खरीद लिया। जिस पर पूर्व पालिकाध्यक्ष ने मोहरश्री पब्लिक स्कूल का भवन खड़ा कर दिया। मगर जमीन का वर्ष 2009 में धोखाधड़ी कर कृषि भूमि को आबादी घोषित कराया गया। आबादी घोषित कराते समय यह दर्शाया गया कि जमीन खरीदने वाला और बेचने वाला अनुसूचित जाति के नहीं है। वर्ष 2011 में मामला प्रकाश में आया तो जांच शुरू की गई। सदर एसडीएम महेंद्र सिंह तंवर ने राकेश गांधी और प्रेम सिंह को दोषी पाया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। जिस पर क्षेत्रीय लेखपाल श्यामबाबू ने कोतवाली देहात में मामला दर्ज कराया है।
व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकते
तहसीलदार दुर्गेश यादव ने बताया कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के पट्टे के जमीन को बिना अनुमति के खरीदा नहीं जा सकता। अनुमति लेने पर अगर कोई खरीद भी लेता है तो उस जमीन को व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पट्टे की जमीन पर खेती ही की जा सकती है। वहीं पट्टे की जमीन को फिर से राज्य सरकार में घोषित कराए जाने के लिए अपर जिलाधिकारी के न्यायालय में मामला विचाराधीन है।
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वर्जन
रिपोर्ट दर्ज होने के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। रही बात विद्यालय की जमीन की तो मैंने जमीन को आबादी घोषित कराए जाने के बाद पूरे स्टांप लगाकर खरीदा है। अगर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है तो यह राजनैतिक रुप से गलत फंसाए जाने को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मैंने कहीं भी किसी भी तरह की कोई धोखाधड़ी नहीं की है।
राकेश गांधी, पूर्व पालिकाध्यक्ष
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सोमवार को तहसीलदार दुर्गेश यादव ने बताया कि वर्ष 2004 में पूर्व पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी ने प्रेमसिंह पुत्र भन्ना सिंह निवासी नगला हन्नी से 1.620 हेक्टेयर पट्टे की जमीन को खरीद लिया। जिस पर पूर्व पालिकाध्यक्ष ने मोहरश्री पब्लिक स्कूल का भवन खड़ा कर दिया। मगर जमीन का वर्ष 2009 में धोखाधड़ी कर कृषि भूमि को आबादी घोषित कराया गया। आबादी घोषित कराते समय यह दर्शाया गया कि जमीन खरीदने वाला और बेचने वाला अनुसूचित जाति के नहीं है। वर्ष 2011 में मामला प्रकाश में आया तो जांच शुरू की गई। सदर एसडीएम महेंद्र सिंह तंवर ने राकेश गांधी और प्रेम सिंह को दोषी पाया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। जिस पर क्षेत्रीय लेखपाल श्यामबाबू ने कोतवाली देहात में मामला दर्ज कराया है।
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व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकते
तहसीलदार दुर्गेश यादव ने बताया कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के पट्टे के जमीन को बिना अनुमति के खरीदा नहीं जा सकता। अनुमति लेने पर अगर कोई खरीद भी लेता है तो उस जमीन को व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पट्टे की जमीन पर खेती ही की जा सकती है। वहीं पट्टे की जमीन को फिर से राज्य सरकार में घोषित कराए जाने के लिए अपर जिलाधिकारी के न्यायालय में मामला विचाराधीन है।
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रिपोर्ट दर्ज होने के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। रही बात विद्यालय की जमीन की तो मैंने जमीन को आबादी घोषित कराए जाने के बाद पूरे स्टांप लगाकर खरीदा है। अगर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है तो यह राजनैतिक रुप से गलत फंसाए जाने को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मैंने कहीं भी किसी भी तरह की कोई धोखाधड़ी नहीं की है।
राकेश गांधी, पूर्व पालिकाध्यक्ष