{"_id":"5ad8a51c4f1c1b042e8b4587","slug":"121524147484-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नृत्य गोपाल के आंगन में मैं नाचूं बारम्बार..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नृत्य गोपाल के आंगन में मैं नाचूं बारम्बार..
Updated Thu, 19 Apr 2018 08:19 PM IST
विज्ञापन
कृष्णा
- फोटो : डैमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृंदावन (मथुरा)। मोतीझील स्थित स्वामी अखंडानंद आश्रम में चल रहा ठाकुर नृत्य गोपाल भगवान का स्वर्णिम पाटोत्सव बुधवार देररात भजन संध्या के साथ संपन्न हो गया। भजन गायक गोविंद भार्गव ने भगवान राधाकृष्ण के भजनों की प्रस्तुति देकर सभी को कृष्ण भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
देररात तक संत और श्रद्धालु ठाकुर नृत्य गोपाल भगवान की भक्ति में झूमते-नाचते नजर आए। गोविंद भार्गव ने नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, मेरो ठाकुर जन्म लियो है, नृत्य गोपाल के आंगन मैं नाचूं बारम्बार, वृंदावन का कृष्ण कन्हैया, हम पै कृपा करियौ राधारानी आदि भजनों की भक्तिमय प्रस्तुति दी।
महोत्सव संयोजक स्वामी महेशानंद सरस्वती ने कहा कि प्रभु और संतों के उत्सव में भाग लेने का सौभाग्य प्रभु कृपा से कम नहीं है। स्वामी प्रेमानंद सरस्वती, स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती, सदाकांत शुक्ला, पवित्र कुमार दुबे, स्वामी सेवानंद ब्रह्मचारी, डा. स्वामी गोविंदानंद, स्वामी प्रणवानंद, स्वामी पूर्णानंद, विष्णुकांत शास्त्री, स्वामी विश्वात्मानंद डा. मनोज मोहन शास्त्री उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
देररात तक संत और श्रद्धालु ठाकुर नृत्य गोपाल भगवान की भक्ति में झूमते-नाचते नजर आए। गोविंद भार्गव ने नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, मेरो ठाकुर जन्म लियो है, नृत्य गोपाल के आंगन मैं नाचूं बारम्बार, वृंदावन का कृष्ण कन्हैया, हम पै कृपा करियौ राधारानी आदि भजनों की भक्तिमय प्रस्तुति दी।
विज्ञापन
महोत्सव संयोजक स्वामी महेशानंद सरस्वती ने कहा कि प्रभु और संतों के उत्सव में भाग लेने का सौभाग्य प्रभु कृपा से कम नहीं है। स्वामी प्रेमानंद सरस्वती, स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती, सदाकांत शुक्ला, पवित्र कुमार दुबे, स्वामी सेवानंद ब्रह्मचारी, डा. स्वामी गोविंदानंद, स्वामी प्रणवानंद, स्वामी पूर्णानंद, विष्णुकांत शास्त्री, स्वामी विश्वात्मानंद डा. मनोज मोहन शास्त्री उपस्थित थे।
विज्ञापन