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नहीं रहे रासलीला के पुरोधा पद्मश्री स्वामी रामस्वरूप शर्मा
Updated Sat, 17 Feb 2018 08:58 PM IST
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स्वामी रामस्वरूप शर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वृंदावन (मथुरा)। मथुरा-वृंदावन विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक व देश के प्रसिद्ध रासाचार्य पद्मश्री स्वामी रामस्वरूप शर्मा शनिवार की दोपहर हृदयगति रुक जाने से रमणरेती निवास पर गोलोकवास हो गए। 88 वर्षीय स्वामी रामस्वरूप शर्मा पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
मध्य युगीन भक्तिकाल में ब्रजरास लीला अनुकरण के उद्वादक आचार्य घमंडी स्वामी के वंश में स्वामी मेघश्याम शर्मा के घर 12 सितंबर 1931 को स्वामी रामस्वरूप शर्मा का जन्म हुआ। बालकाल से ही दादा स्वामी मदनलाल शर्मा और पिता स्वामी मेघश्याम शर्मा से शास्त्रीय, हवेली संगीत की शिक्षा ग्रहण की। रामस्वरूप शर्मा छह वर्ष की उम्र से ही रासलीला के क्षेत्र में अभिनय करने लगे। जीवन के अंतिम पड़ाव पर गत दिनों दो फरवरी 2018 को भोपाल के पैरसिया गांव में रासलीला का मंचन किया। 82 वर्षों से रासलीला के क्षेत्र में अभिनय कला के साथ देश विदेश में शास्त्रीय, हवेली और लोकसंगीत के साथ 15 हजार से अधिक लीला मंचन किए।
यह मिले सम्मान
- 2005 में पद्मश्री से सम्मानित।
-2006 में राष्ट्रीय तुलसी सम्मान।
- 1976-77 में उत्तर प्रदेश नाट्य अकादमी।
- 2005 में श्याम ब्रज विभूति सम्मान।
- 2006 में कलाभूषण सम्मान-संगीत महोपाध्याय की उपाधि।
- कलाभूषण सम्मान, रासकला निधि सम्मान, ब्रज की अमूल्य निधि सम्मान।
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मध्य युगीन भक्तिकाल में ब्रजरास लीला अनुकरण के उद्वादक आचार्य घमंडी स्वामी के वंश में स्वामी मेघश्याम शर्मा के घर 12 सितंबर 1931 को स्वामी रामस्वरूप शर्मा का जन्म हुआ। बालकाल से ही दादा स्वामी मदनलाल शर्मा और पिता स्वामी मेघश्याम शर्मा से शास्त्रीय, हवेली संगीत की शिक्षा ग्रहण की। रामस्वरूप शर्मा छह वर्ष की उम्र से ही रासलीला के क्षेत्र में अभिनय करने लगे। जीवन के अंतिम पड़ाव पर गत दिनों दो फरवरी 2018 को भोपाल के पैरसिया गांव में रासलीला का मंचन किया। 82 वर्षों से रासलीला के क्षेत्र में अभिनय कला के साथ देश विदेश में शास्त्रीय, हवेली और लोकसंगीत के साथ 15 हजार से अधिक लीला मंचन किए।
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यह मिले सम्मान
- 2005 में पद्मश्री से सम्मानित।
-2006 में राष्ट्रीय तुलसी सम्मान।
- 1976-77 में उत्तर प्रदेश नाट्य अकादमी।
- 2005 में श्याम ब्रज विभूति सम्मान।
- 2006 में कलाभूषण सम्मान-संगीत महोपाध्याय की उपाधि।
- कलाभूषण सम्मान, रासकला निधि सम्मान, ब्रज की अमूल्य निधि सम्मान।