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डायरिया से वृद्ध और बुखार से बालक की मौत
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:03 PM IST
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डेमाे
- फोटो : डेमाे
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मैनपुरी/ किशनी। संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने से जिला अस्पताल में वृद्ध की मौत हो गई। वहीं, किशनी में बालक ने भी बुखार से पीड़ित होने पर दम तोड़ दिया। उधर, बीमारियों से पीड़ित 22 मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। गुरुवार को सुबह से ही जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही। अस्पताल पहुंचे न्यू बस्ती देवपुरा निवासी 75 वर्षीय रमेश चंद्र सक्सेना पुत्र मेवाराम सक्सेना को दो दिन से डायरिया की शिकायत थी। परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टर अनुज कमार ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वहीं, किशनी क्षेत्र के गांव सठिगवां निवासी बीटू गुप्ता के एक वर्षीय पुत्र आयुष को पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। परिजन उसका एक निजी डॉक्टर के यहां उपचार करा रहे थे। गुरुवार को परिजन हालत बिगड़ने पर उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां से उसे सैफई के लिए रेफर कर दिया गया। सैफई में उपचार के दौरान बीटू की मौत हो गई। डॉ. अजय कुमार ने बताया कि दोनों ही मरीजों को गंभीर हालत में लाया गया। रमेश चंद्र की तो रास्ते में ही मौत हो गई थी। दूसरे को सैफई रेफर किया गया था।
मैनपुरी। जनपद में यदि संक्रामक बीमारियों से एक माह में 19 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें से 15 मरीज की जिला अस्पताल में ही मौत हुई है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड, स्वाइनफ्लू वार्ड, मलेरिया वार्ड आदि के परचे लगा दिए गए हैं। लेकिन इनमें बेड के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। मरीजों को देखते ही सैफई के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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वहीं, किशनी क्षेत्र के गांव सठिगवां निवासी बीटू गुप्ता के एक वर्षीय पुत्र आयुष को पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। परिजन उसका एक निजी डॉक्टर के यहां उपचार करा रहे थे। गुरुवार को परिजन हालत बिगड़ने पर उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां से उसे सैफई के लिए रेफर कर दिया गया। सैफई में उपचार के दौरान बीटू की मौत हो गई। डॉ. अजय कुमार ने बताया कि दोनों ही मरीजों को गंभीर हालत में लाया गया। रमेश चंद्र की तो रास्ते में ही मौत हो गई थी। दूसरे को सैफई रेफर किया गया था।
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मैनपुरी। जनपद में यदि संक्रामक बीमारियों से एक माह में 19 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें से 15 मरीज की जिला अस्पताल में ही मौत हुई है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड, स्वाइनफ्लू वार्ड, मलेरिया वार्ड आदि के परचे लगा दिए गए हैं। लेकिन इनमें बेड के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। मरीजों को देखते ही सैफई के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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