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नुक्कड़ नाटक की पटकथाएं लिखवाईं, अब भुगतान नहीं
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:10 PM IST
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नुक्कड़ नाटक की पटकथाएं लिखवाईं, अब भुगतान नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण को सफल करने के लिए एक कलाकार से नाटक कराए गये और उससे नाटकों की पटकथाएं लिखाईं गईं। लेकिन अब जिला समन्वयक भुगतान के लिए नाटक कर रहे हैं। पिछले छह माह से भुगतान के लिए भटक रहा कलाकार मंगलवार को एसएसपी से शिकायतें करने पहुंचा। बताया कि जिला समन्वयक खुद को जिले के एक बड़े अधिकारी का रिश्तेदार बताकर उसके साथ अभद्रता करते हुए उसे भगा देता है।
शहर के अशोक नगर निवासी राजीव कपूर पेशे से पटकथा लेखक और नाटकों के निर्देशक हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर माह में जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत हुए नुक्कड़ नाटकों के लिए उन्हें पटकथा लिखने और नाटकों को आयोजित कराने के लिए कहा गया। खुद को स्वच्छ भारत मिशन का अधिकारी कहने वाले विजय वर्मा के कहने पर उन्होंने 12 से 21 दिसंबर तक डायट के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया और नाटकों का आयोजन कराया। इसके बाद जब उन्होंने जिला समन्वयक से बतौर फीस तय हुए 45 हजार रुपये मांगे, तो उन्होंने टाल दिया। इसे लेकर राजीव कपूर ने एडीएम, एसडीएम समेत तमाम अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। नुक्कड़ नाटकों के लिए न तो कोई अनुमोदन लिया गया और न ही कोई वर्कऑर्डर जारी कराया गया। अब पीड़ित ने एसएसपी से विजय वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज करने और उसका भुगतान कराने की मांग की। मामले में उन्होंने पीएमओ और सीएम कार्यालय को भी चिट्ठी लिखकर शिकायत की है।
संस्था का समन्वयक और सुविधाएं सरकारी
खुद को यूएन की एक संस्था का समन्वयक कहने वाले विजय वर्मा को जिला प्रशासन ने सारी सरकारी सुविधाएं दे रखी हैं। जिला पंचायत में सरकारी बंगले के साथ गाड़ी और खाना बनाने के लिए एक सरकारी कर्मचारी दिया गया। आखिर प्रशासन एक प्राइवेट एनजीओ के समन्वयक पर इतना मेहरबान क्यों है? यह सवाल लोगों के जेहन में अक्सर आता है।
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पहले भी हो चुकी है शिकायत
खुद को स्वच्छ भारत मिशन का अधिकारी कहने वाले के खिलाफ पहले भी शिकायत हो चुकी है। कई ब्लॉक कर्मचारियों और दो महिला ग्राम पंचायत अधिकारियों ने विजय वर्मा के खिलाफ अभद्रता करने की शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों ने मामले को दबा दिया।
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शहर के अशोक नगर निवासी राजीव कपूर पेशे से पटकथा लेखक और नाटकों के निर्देशक हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर माह में जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत हुए नुक्कड़ नाटकों के लिए उन्हें पटकथा लिखने और नाटकों को आयोजित कराने के लिए कहा गया। खुद को स्वच्छ भारत मिशन का अधिकारी कहने वाले विजय वर्मा के कहने पर उन्होंने 12 से 21 दिसंबर तक डायट के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया और नाटकों का आयोजन कराया। इसके बाद जब उन्होंने जिला समन्वयक से बतौर फीस तय हुए 45 हजार रुपये मांगे, तो उन्होंने टाल दिया। इसे लेकर राजीव कपूर ने एडीएम, एसडीएम समेत तमाम अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। नुक्कड़ नाटकों के लिए न तो कोई अनुमोदन लिया गया और न ही कोई वर्कऑर्डर जारी कराया गया। अब पीड़ित ने एसएसपी से विजय वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज करने और उसका भुगतान कराने की मांग की। मामले में उन्होंने पीएमओ और सीएम कार्यालय को भी चिट्ठी लिखकर शिकायत की है।
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संस्था का समन्वयक और सुविधाएं सरकारी
खुद को यूएन की एक संस्था का समन्वयक कहने वाले विजय वर्मा को जिला प्रशासन ने सारी सरकारी सुविधाएं दे रखी हैं। जिला पंचायत में सरकारी बंगले के साथ गाड़ी और खाना बनाने के लिए एक सरकारी कर्मचारी दिया गया। आखिर प्रशासन एक प्राइवेट एनजीओ के समन्वयक पर इतना मेहरबान क्यों है? यह सवाल लोगों के जेहन में अक्सर आता है।
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पहले भी हो चुकी है शिकायत
खुद को स्वच्छ भारत मिशन का अधिकारी कहने वाले के खिलाफ पहले भी शिकायत हो चुकी है। कई ब्लॉक कर्मचारियों और दो महिला ग्राम पंचायत अधिकारियों ने विजय वर्मा के खिलाफ अभद्रता करने की शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों ने मामले को दबा दिया।