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Etah News: बाल विवाह के खिलाफ अभियान को मिली वैश्विक पहचान
Sun, 06 Sep 2026 01:48 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:48 AM IST
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धुमरी के विद्यालय में बाल विवाह के प्रति जागरूकता फैलाते एक्सीलेंट सिविल अकैडमी ट्रस्ट के पदा
एटा। बाल विवाह के खिलाफ जिले में जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे एक्सीलेंट सिविल अकादमी ट्रस्ट (ईकैट ग्रुप) ने संयुक्त राष्ट्र के 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने का स्वागत किया है। संस्था ने इसे बाल अधिकारों की दिशा में काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों के प्रयासों की वैश्विक मान्यता बताया।
शिक्षक दिवस पर जनता इंटर कॉलेज धुमरी समेत विभिन्न स्कूलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम शनिवार को हुए। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष आनंद पांडेय, कॉलेज प्रबंधक भास्कर दत्त मिश्रा, प्रधानाचार्य विष्णु पांडेय, प्रधान कालीचरण, पुलिस विभाग से एसआई रमेश और मिशन शक्ति की टीम मौजूद रही। ईकैट ग्रुप के निदेशक विवेक सिंह ने कहा कि जिले में सरकार और प्रशासन के सहयोग से कानूनी हस्तक्षेप के जरिए अब तक 463 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल कानून से बाल विवाह समाप्त नहीं होगा। इसके लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में जागरूकता, बच्चों का पुन: स्कूल में दाखिला और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र में यह पहल आगे बढ़ी।
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शिक्षक दिवस पर जनता इंटर कॉलेज धुमरी समेत विभिन्न स्कूलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम शनिवार को हुए। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष आनंद पांडेय, कॉलेज प्रबंधक भास्कर दत्त मिश्रा, प्रधानाचार्य विष्णु पांडेय, प्रधान कालीचरण, पुलिस विभाग से एसआई रमेश और मिशन शक्ति की टीम मौजूद रही। ईकैट ग्रुप के निदेशक विवेक सिंह ने कहा कि जिले में सरकार और प्रशासन के सहयोग से कानूनी हस्तक्षेप के जरिए अब तक 463 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल कानून से बाल विवाह समाप्त नहीं होगा। इसके लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में जागरूकता, बच्चों का पुन: स्कूल में दाखिला और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र में यह पहल आगे बढ़ी।
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