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बैंकों की हड़ताल में 1000 करोड़ का लेनदेन अटका
Updated Wed, 30 May 2018 08:26 PM IST
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बैंक हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मथुरा। यूएफबीयू के आह्वान पर वेतन समझौता लागू करने की मांग पर जिले के सभी बैंक की शाखाओं के 2500 अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण करीब 1000 करोड़ रुपये का लेनदेन अटक गया। होली गेट स्थित सिंडीकेट बैंक की होली गेट शाखा के बाहर हड़ताली कर्मचारियों ने बैंक प्रबंधन और वित्त मंत्रालय की हठधर्मिता के खिलाफ नारेबाजी कर आक्रोश जताया।
बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन करीब एक हजार करोड़ का लेनदेन अटक गया। जरूरतमंद लोगों ने एटीएम बूथों का रुख किया तो वहां लंबी कतारें लग गईं। अग्रणी सिंडीकेट बैंक की होलीगेट शाखा के सामने हड़ताली कर्मचारी एकत्र हुए और बैंक प्रबंधन व वित्त मंत्रालय की हठधर्मिता और उदासीन रवैए के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। यूएफबीयू के जिला संयोजक केके पांडेय की अध्यक्षता में सभा संपन्न हुई।
यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के मंत्री बामनजी चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक कर्मियों का वेतन सेवा शर्तों संबंधी द्विपक्षीय समझौता पांच वर्ष में होता है। पिछले वर्ष मई में मांग पत्र देने के बाद वार्ताओं के कई दौर चले। बैंक प्रबंधन व वित्तमंत्रालय की उदासीनता के चलते वार्ताएं असफल हो गईं। चौधरी विजेंद्र सिंह, कृष्णा, विकास, नंद किशोर, मुरारी लाल, चौधरी अमर सिंह, राम अवतार, अशोक शाक्य, आलोक शर्मा, सुंदर श्याम, अशोक, डीके अग्रवाल, जीपी कुशवाह, अरविंद बंसल, शिशिर भार्गव, एके जैन, आशीष प्रजापति, जगमोहन, रामकृष्ण शर्मा, हर्ष भाटिया, आनंद गर्ग, जुगल किशोर अग्रवाल, गोपाल खन्ना आदि ने विचार व्यक्त किए।
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बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन करीब एक हजार करोड़ का लेनदेन अटक गया। जरूरतमंद लोगों ने एटीएम बूथों का रुख किया तो वहां लंबी कतारें लग गईं। अग्रणी सिंडीकेट बैंक की होलीगेट शाखा के सामने हड़ताली कर्मचारी एकत्र हुए और बैंक प्रबंधन व वित्त मंत्रालय की हठधर्मिता और उदासीन रवैए के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। यूएफबीयू के जिला संयोजक केके पांडेय की अध्यक्षता में सभा संपन्न हुई।
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यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के मंत्री बामनजी चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक कर्मियों का वेतन सेवा शर्तों संबंधी द्विपक्षीय समझौता पांच वर्ष में होता है। पिछले वर्ष मई में मांग पत्र देने के बाद वार्ताओं के कई दौर चले। बैंक प्रबंधन व वित्तमंत्रालय की उदासीनता के चलते वार्ताएं असफल हो गईं। चौधरी विजेंद्र सिंह, कृष्णा, विकास, नंद किशोर, मुरारी लाल, चौधरी अमर सिंह, राम अवतार, अशोक शाक्य, आलोक शर्मा, सुंदर श्याम, अशोक, डीके अग्रवाल, जीपी कुशवाह, अरविंद बंसल, शिशिर भार्गव, एके जैन, आशीष प्रजापति, जगमोहन, रामकृष्ण शर्मा, हर्ष भाटिया, आनंद गर्ग, जुगल किशोर अग्रवाल, गोपाल खन्ना आदि ने विचार व्यक्त किए।
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