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टूटी ईंट पर बैठकर पढ़े ‘स्मार्ट सिटी’ के बच्चे
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:51 AM IST
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आगरा। स्मार्ट सिटी बनने जा रही ताजनगरी की हकीकत की यही तस्वीर है। यह स्कूल है जगदीशपुरा का। नाम है प्राचीन प्राथमिक विद्यालय । मानसून क्या आया, बच्चों की मुसीबत आ गई। सोमवार को स्कूल पहुंचे तो पानी भरा था। इमारत जर्जर है, कभी भी गिर सकती है, इसलिए टीचर ने खुले मैदान में बिठा दिया। बैठने के लिए बेंच क्या टाट-पट्टी तक नहीं है। बेचारे बच्चे, बैठने के लिए कोई टूटी ईंट उठा लाया, तो कोई चप्पल उतारकर उन पर ही बैठ गया। पढ़ाई भी ठीक से नहीं हुई, क्योंकि ब्लैक बोर्ड नहीं था। और तो और मिड डे मील भी नहीं मिला। घास पर बैठे बच्चों को मच्छर काटते रहे।
यह हकीकत सिर्फ बानगी है। शहर के आधे से ज्यादा स्कूलों का यही हाल है। जर्जर इमारत, बारिश को झेल नहीं पाईं। जगदीशपुरा का यह विद्यालय किराए के भवन में चलता है। आधे में मकान मालिक रहता है, आधे में स्कूल चलता है। सोमवार को बच्चों को जिस जगह पर बिठाया गया, उसके पास में केमिकल के ड्रम रखे थे। अध्यापिकाओं ने यह भी ख्याल नहीं रखा कि पिछले साल ड्रम पलटने से बच्चे घायल हो गए थे। इसमें 66 बच्चे पढ़ते हैं। इसी परिसर में जूनियर हाईस्कूल का भी एक कमरा है। इसमें 26 छात्र-छात्राएं हैं। मुख्य शिक्षिका अलका पालीवाल बताती हैं कि स्कूल किराए पर चल रहा है। कमरा नहीं है। जिला प्रशासन और विभाग के अधिकारियों से सुविधा कराने की मांग कर चुके हैं।
स्कूल में शौचालय भी नहीं
इस विद्यालय में शौचालय भी नहीं है। पेयजल की व्यवस्था भी नहीं। बच्चे पानी पीने के लिए दूर जाते हैं। मिड-डे मील भी खुले में बनता है। वह भी रसोई गैस पर नहीं, लकड़ी से जलने वाले चूल्हे पर।
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यह हकीकत सिर्फ बानगी है। शहर के आधे से ज्यादा स्कूलों का यही हाल है। जर्जर इमारत, बारिश को झेल नहीं पाईं। जगदीशपुरा का यह विद्यालय किराए के भवन में चलता है। आधे में मकान मालिक रहता है, आधे में स्कूल चलता है। सोमवार को बच्चों को जिस जगह पर बिठाया गया, उसके पास में केमिकल के ड्रम रखे थे। अध्यापिकाओं ने यह भी ख्याल नहीं रखा कि पिछले साल ड्रम पलटने से बच्चे घायल हो गए थे। इसमें 66 बच्चे पढ़ते हैं। इसी परिसर में जूनियर हाईस्कूल का भी एक कमरा है। इसमें 26 छात्र-छात्राएं हैं। मुख्य शिक्षिका अलका पालीवाल बताती हैं कि स्कूल किराए पर चल रहा है। कमरा नहीं है। जिला प्रशासन और विभाग के अधिकारियों से सुविधा कराने की मांग कर चुके हैं।
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स्कूल में शौचालय भी नहीं
इस विद्यालय में शौचालय भी नहीं है। पेयजल की व्यवस्था भी नहीं। बच्चे पानी पीने के लिए दूर जाते हैं। मिड-डे मील भी खुले में बनता है। वह भी रसोई गैस पर नहीं, लकड़ी से जलने वाले चूल्हे पर।
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