{"_id":"5a564ee54f1c1bf2188b4568","slug":"111515605733-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जागरूकता के अभाव में दम तोड़ गई मातृ वंदन योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जागरूकता के अभाव में दम तोड़ गई मातृ वंदन योजना
Updated Wed, 10 Jan 2018 11:17 PM IST
विज्ञापन
baby delivery
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना जिले में जागरूकता के अभाव में दम तोड़ गई। साल भर में जिले में महज 17 गर्भवतियों को ही योजना का लाभ मिल पाया है। जबकि जिले में 151 गर्भवतियों के आवेदन लंबित पड़े रहे।
केंद्र सरकार ने पिछले साल एक जनवरी 2017 को प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत पहले गर्भधारण पर गर्भवती को पांच हजार रुपये का लाभ दिया जाना था। मगर जिले में जागरूकता के अभाव में साल भर में महज 17 गर्भवतियों को योजना का लाभ मिल पाया है। जबकि 151 आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। दरअसल, योजना को स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग के साथ मिलकर चलाया जाना था। मगर दोनों विभागों ने योजना को लेकर खास रुचि नहीं दिखाई। सीएमओ डा. अजय अग्रवाल ने बताया कि योजना के तहत जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं। आशाओं को अधिक से अधिक पंजीकरण के लिए निर्देश दिए गए हैं।
तीन बार में जानी थी राशि
गर्भवती को योजना के तहत राशि का भुगतान तीन बार में किया जाना था। गर्भवस्था की शुरुआती पांच महीने के अंदर पंजीकरण पर एक हजार रुपये, छह महीने पूरे करने के बाद दो हजार रुपये और शिशु के जन्म के बाद दो हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। सारी राशि गर्भवती के साथ खाते में दी जानी है।
विज्ञापन
ये रहा हाल
208 आवेदन आए पूरे साल में।
17 गर्भवतियों को दिया गया लाभ।
151 आवेदन पड़े हैं लंबित।
40 आवेदन किए गए निरस्त।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने पिछले साल एक जनवरी 2017 को प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत पहले गर्भधारण पर गर्भवती को पांच हजार रुपये का लाभ दिया जाना था। मगर जिले में जागरूकता के अभाव में साल भर में महज 17 गर्भवतियों को योजना का लाभ मिल पाया है। जबकि 151 आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। दरअसल, योजना को स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग के साथ मिलकर चलाया जाना था। मगर दोनों विभागों ने योजना को लेकर खास रुचि नहीं दिखाई। सीएमओ डा. अजय अग्रवाल ने बताया कि योजना के तहत जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं। आशाओं को अधिक से अधिक पंजीकरण के लिए निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
तीन बार में जानी थी राशि
गर्भवती को योजना के तहत राशि का भुगतान तीन बार में किया जाना था। गर्भवस्था की शुरुआती पांच महीने के अंदर पंजीकरण पर एक हजार रुपये, छह महीने पूरे करने के बाद दो हजार रुपये और शिशु के जन्म के बाद दो हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। सारी राशि गर्भवती के साथ खाते में दी जानी है।
विज्ञापन
ये रहा हाल
208 आवेदन आए पूरे साल में।
17 गर्भवतियों को दिया गया लाभ।
151 आवेदन पड़े हैं लंबित।
40 आवेदन किए गए निरस्त।