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मुंशी प्रेमचंद के लेखन ने जगाई राष्ट्रवाद की चेतना
Updated Sat, 19 Aug 2017 11:39 PM IST
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आगरा। आगरा कॉलेज में आयोजित स्मरण प्रेमचंद-17 की शृंखला में शनिवार को उपन्यास, राष्ट्रवाद और प्रेमचंद विषय पर संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता रूप में हिंदी के प्रतिष्ठित आलोचक प्रो. मैनेजर पांडे रहे। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ भारतीयों में राष्ट्रवाद की चेतना जगाई, लेकिन इटली और जर्मनी में राष्ट्रवाद के कुत्सित रूप को देखकर उससे घृणा करने लगे। राष्ट्रवाद एक धोखा है।
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पूरे भारतीय समाज की चिंता करने वाले साहित्यकार थे। बिहार के भूकंप पर उन्होंने महात्मा गांधी की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। प्रेमचंद स्वाधीनता आंदेालन के लेखक है। गबन के पात्र देवीदीन और आहुति की नायिका के जरिए उन्होंने गरीब, किसानों, मजदूरों और महिलाओं की आजादी की अलख जगाई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रामवीर ने कहा कि प्रेमचंद जब लिख रहे थे तब भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिकता के खिलाफ जनमानस तैयार हो रहा था। उनकी चिंता थी कि जॉन की जगह गोविंद न बैठ जाए, लेकिन किसान और दलित पहले जैसे ही रह गए। पहले प्रेमचंद गांधीजी से प्रभावित थे लेकिन 1925 के बाद में उनका झुकाव डॉ. अंबेडकर की ओर हो गया।
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संगोष्ठी में आगरा कालेज प्रधानचार्य डॉ. एके गुप्ता, डॉ. अखिलेश श्रोतिय, डॉ. नसरीन बेगम, डॉ. ज्योत्सना रघुवंशी, प्रो. रवि भूषण, डॉ. खुशीराम वर्मा, अभिनय प्रसाद, डॉ. प्रेम शंकर, अनिल शुक्ला, संजय जोशी,डॉ. ब्रजराज सिंह, डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, अनिल जैन, डॉ. एसके पांडे मौजूद रहे। संचालन डॉ. प्रियम अंकित ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ब्रजेश चंद्रा ने किया।
डॉ. मिहीलाल की शोकसभा आज
आगरा। लोकनाट्य भगत पर पहली पीएचडी करने वाले डॉ. मिहीलाल यादव के निधन के बाद उन्हें श्रृद्धांजलि देने को माईथान स्थित गुरुद्वारा में सुबह 10 बजे शोकसभा आयोजित की जाएगी। रंगलीला संयोजक योगेंद्र दुबे, राकेश यादव ने संस्कृति प्रेमियों को श्रृद्धांजलि सभा में आमंत्रित किया है।
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उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पूरे भारतीय समाज की चिंता करने वाले साहित्यकार थे। बिहार के भूकंप पर उन्होंने महात्मा गांधी की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। प्रेमचंद स्वाधीनता आंदेालन के लेखक है। गबन के पात्र देवीदीन और आहुति की नायिका के जरिए उन्होंने गरीब, किसानों, मजदूरों और महिलाओं की आजादी की अलख जगाई।
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संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रामवीर ने कहा कि प्रेमचंद जब लिख रहे थे तब भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिकता के खिलाफ जनमानस तैयार हो रहा था। उनकी चिंता थी कि जॉन की जगह गोविंद न बैठ जाए, लेकिन किसान और दलित पहले जैसे ही रह गए। पहले प्रेमचंद गांधीजी से प्रभावित थे लेकिन 1925 के बाद में उनका झुकाव डॉ. अंबेडकर की ओर हो गया।
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संगोष्ठी में आगरा कालेज प्रधानचार्य डॉ. एके गुप्ता, डॉ. अखिलेश श्रोतिय, डॉ. नसरीन बेगम, डॉ. ज्योत्सना रघुवंशी, प्रो. रवि भूषण, डॉ. खुशीराम वर्मा, अभिनय प्रसाद, डॉ. प्रेम शंकर, अनिल शुक्ला, संजय जोशी,डॉ. ब्रजराज सिंह, डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, अनिल जैन, डॉ. एसके पांडे मौजूद रहे। संचालन डॉ. प्रियम अंकित ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ब्रजेश चंद्रा ने किया।
डॉ. मिहीलाल की शोकसभा आज
आगरा। लोकनाट्य भगत पर पहली पीएचडी करने वाले डॉ. मिहीलाल यादव के निधन के बाद उन्हें श्रृद्धांजलि देने को माईथान स्थित गुरुद्वारा में सुबह 10 बजे शोकसभा आयोजित की जाएगी। रंगलीला संयोजक योगेंद्र दुबे, राकेश यादव ने संस्कृति प्रेमियों को श्रृद्धांजलि सभा में आमंत्रित किया है।