{"_id":"675690463dd318cb71058328","slug":"geeta-jayanti-2024-kab-hai-date-time-geeta-ke-updesh-puja-vidhi-in-hindi-2024-12-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"11 दिसंबर को गीता जयंती, जानिए भगवद्गीता का महत्व और महाभारत युद्ध से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
11 दिसंबर को गीता जयंती, जानिए भगवद्गीता का महत्व और महाभारत युद्ध से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं
Mon, 09 Dec 2024 12:08 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 09 Dec 2024 12:08 PM IST
सार
Geeta Jayanti 2024: हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया।
विज्ञापन
गीता जयंती 2024: गीता जयंती पर भगवद्गीता का पाठ, यज्ञ और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Geeta Jayanti 2024 : गीता जयंती भगवद्गीता के उपदेश की स्मृति में मनाई जाती है, जो महाभारत के युद्ध के समय भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिए थे। यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है। गीता जयंती हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार 11 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी मनाई जाएगी।
महाभारत युद्ध का परिप्रेक्ष्य
गीता जयंती का सीधा संबंध महाभारत युद्ध से है। महाभारत युद्ध कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध धर्म और अधर्म के बीच का संघर्ष था। जब अर्जुन ने युद्ध में अपने ही सगे-संबंधियों, गुरु द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म के खिलाफ युद्ध करने से इनकार कर दिया, तब वे मानसिक और भावनात्मक संकट में आ गए। अर्जुन के इस दुविधा से ग्रस्त होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें धर्म, कर्म और जीवन के गूढ़ रहस्यों का उपदेश दिया। यह उपदेश ही भगवद्गीता के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
भगवद्गीता का महत्व
भगवद्गीता को "जीवन का सार" कहा जाता है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं धर्म, कर्म, भक्ति और ज्ञान पर गहन शिक्षा देते हैं। गीता के उपदेश सिर्फ अर्जुन के लिए नहीं थे, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए हैं। इसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को सिखाया कि व्यक्ति को निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए और फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। हिंदू धर्म में चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद है। इन चारों वेदों का सार गीता में मिलता है यही कारण है भगवतगीता को हिंदू धर्म का पवित्र और सर्वमान्य धर्मग्रंथ माना जाता है। इसकी महत्ता इतनी है कि यदि कोई गीता को स्पर्श कर ले तो वह झूठ नहीं बोलता है।
विज्ञापन
पौराणिक मान्यता
गीता जयंती की पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ब्रह्मज्ञान प्रदान किया था। यह ज्ञान आत्मा, परमात्मा और जीवन-मरण के चक्र को समझने में सहायक है। गीता में बताया गया है कि धर्म का पालन करते हुए जीवन जीना और अपने कर्मों का निर्वाह करना ही मोक्ष का मार्ग है।
धार्मिक मान्यता और महत्व
गीता जयंती पर भगवद्गीता का पाठ, यज्ञ और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन लोग श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ कर भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं। कुरुक्षेत्र जहां महाभारत युद्ध हुआ था इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
आधुनिक संदर्भ में गीता का महत्व
आज भी भगवद्गीता के उपदेश प्रासंगिक हैं। यह जीवन में आने वाले संघर्षों से उबरने का मार्ग दिखाती है। गीता व्यक्ति को अपने कर्तव्यों को सही ढंग से निभाने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
विज्ञापन
महाभारत युद्ध का परिप्रेक्ष्य
गीता जयंती का सीधा संबंध महाभारत युद्ध से है। महाभारत युद्ध कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध धर्म और अधर्म के बीच का संघर्ष था। जब अर्जुन ने युद्ध में अपने ही सगे-संबंधियों, गुरु द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म के खिलाफ युद्ध करने से इनकार कर दिया, तब वे मानसिक और भावनात्मक संकट में आ गए। अर्जुन के इस दुविधा से ग्रस्त होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें धर्म, कर्म और जीवन के गूढ़ रहस्यों का उपदेश दिया। यह उपदेश ही भगवद्गीता के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
विज्ञापन
भगवद्गीता का महत्व
भगवद्गीता को "जीवन का सार" कहा जाता है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं धर्म, कर्म, भक्ति और ज्ञान पर गहन शिक्षा देते हैं। गीता के उपदेश सिर्फ अर्जुन के लिए नहीं थे, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए हैं। इसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को सिखाया कि व्यक्ति को निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए और फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। हिंदू धर्म में चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद है। इन चारों वेदों का सार गीता में मिलता है यही कारण है भगवतगीता को हिंदू धर्म का पवित्र और सर्वमान्य धर्मग्रंथ माना जाता है। इसकी महत्ता इतनी है कि यदि कोई गीता को स्पर्श कर ले तो वह झूठ नहीं बोलता है।
विज्ञापन
पौराणिक मान्यता
गीता जयंती की पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ब्रह्मज्ञान प्रदान किया था। यह ज्ञान आत्मा, परमात्मा और जीवन-मरण के चक्र को समझने में सहायक है। गीता में बताया गया है कि धर्म का पालन करते हुए जीवन जीना और अपने कर्मों का निर्वाह करना ही मोक्ष का मार्ग है।
धार्मिक मान्यता और महत्व
गीता जयंती पर भगवद्गीता का पाठ, यज्ञ और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन लोग श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ कर भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं। कुरुक्षेत्र जहां महाभारत युद्ध हुआ था इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
आधुनिक संदर्भ में गीता का महत्व
आज भी भगवद्गीता के उपदेश प्रासंगिक हैं। यह जीवन में आने वाले संघर्षों से उबरने का मार्ग दिखाती है। गीता व्यक्ति को अपने कर्तव्यों को सही ढंग से निभाने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।