World Environment Day 2020: 30 साल बाद रोहतांग में 60 से घटकर 35 पहुंची पीएम 10 की मात्रा
मानव जीवन में हाहाकार मचा रही कोरोना महामारी के बीच विश्व भर में पर्यावरण ने अपने स्वास्थ्य को सुधार लिया। लोग घरों से नहीं निकले, वाहन नहीं चले, उद्योग बंद रहे, जिसका सीधा लाभ पर्यावरण को मिला। मई और जून में सैलानियों से गुलजार रहने वाले विश्वविख्यात पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे में सन्नाटा पसरा है। 30 साल बाद पहली बार 2020 में रोहतांग दर्रे का वातावरण स्वच्छ हुआ है और पीएम 10 - 60 से घटकर करीब 35 तक पहुंच गया है। बात सिर्फ रोहतांग दर्रे की ही नहीं, बल्कि पूरे देश का पर्यावरण स्वच्छ हो गया है। इस समय यहां न तो बर्फ की परत काली पड़ रही है और न ही ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ी है।
अमूमन समर सीजन में रोहतांग में पहुंचने वाले हजारों वाहनों के धुएं से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। इसके चलते अब रोहतांग समेत आसपास के ग्लेशियरों का रंग भी काला पड़ने लगा। पर्यावरण विशेषज्ञ ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में ग्लेशियरों के सिकुड़ने और बदरंग होने के लिए रोहतांग में पहुंच रहे हजारों पर्यटक वाहनों को कारण मान रहे हैं। जीबी पंत राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा में तैनात वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल ने बताया कि 2014 को एनजीटी ने जब रोहतांग दर्रे पर वाहनों की सीमित संख्या करने के आदेश दिए तो रोहतांग के प्रदूषण में 15 से 20 फीसदी तक कमी आई थी।
इसका खुलासा 2014 से 2016-17 तक किए शोध में हुआ है। इसमें टीएसपी की मात्रा 100 से घटकर 80 और 10 पीएम माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की मात्रा 75 से 60 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक आंकी गई, जबकि कोरोना के चलते टीएसपी की मात्रा करीब 50 और 10 पीएम की मात्रा करीब 35 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंची है। ग्लेशियरों के सिकुड़ने से चिंतित इसरो की मदद से रोहतांग के समीप कोठी में एक ऑब्जर्वेटरी स्थापित किया था। 2010 से 2018 तक हुए अध्ययन में बात सामने आई है कि रोहतांग के साथ धुंधी ग्लेशियर में एयरोसोल की मात्रा खतरनाक पाई गई थी। डॉ. जेसी कुनियाल ने बताया कि कोरोना से पर्यावरण को नई संजीवनी मिली है।
1990 के बाद रोहतांग पहुंचना शुरू हुए पर्यटक
अस्सी और नब्बे के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के तेजी से बढ़ने के बाद देश और विदेश के सैलानियों ने हिमाचल का रुख करना शुरू किया। एक शोध के अनुसार 2014 से पहले रोहतांग में तीन से चार हजार पर्यटक वाहन रोजाना पहुंचते थे। 2014 के बाद एनजीटी ने इसकी संख्या को सीमित कर 1200 कर दिया है।
मिनी स्विट्जरलैंड खज्जियार स्थित झील का पानी हुआ साफ
कोरोना के कारण कर्फ्यू-लॉकडाउन के दौरान मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विख्यात पर्यटन स्थल खज्जियार स्थित झील का पानी साफ हो गया है। देवदार के पेड़ों से घिरे खज्जियार मैदान में हरियाली बढ़ गई। जिला चंबा की बात करें तो प्रदूषण इतना ज्यादा यहां वातावरण को प्रभावित नहीं करता। जिले के पहाड़ हरियाली से भरे हैं। जून में जनजातीय इलाका भरमौर व होली में भी गर्मी बढ़ जाती थी, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि हल्की सी बारिश से अब कंपकंपी बढ़ रही है।