{"_id":"615600188ebc3e09f95a9495","slug":"two-person-died-due-to-scrubtyfes-shimla-news-sml3857213133","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईजीएमसी में स्क्रब टायफस बुजुर्ग समेत दो मरीजों की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईजीएमसी में स्क्रब टायफस बुजुर्ग समेत दो मरीजों की मौत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेडिसिन वार्ड में 24 सितंबर से थे दाखिल, एक माह में स्क्रब टायफस से सात मौतें
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस से मरीजों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा। आईजीएमसी में वीरवार को सुबह के वक्त एक 83 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई है, इसके बाद शाम के वक्त इसी बीमारी से एक महिला ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में लगातार बीमारी से मरीजों की मौत होने से हड़कंप मचा हुआ है। अस्पताल में इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या अब सात हो गई है।
अस्पताल में एक दिन के भीतर दो मरीजों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है। घुमारवीं बिलासपुर के रहने वाले बुजुर्ग मरीज को 24 सितंबर को अस्पताल में दाखिल किया था। मरीज का मेडिसिन वार्ड में लगातार चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चल रहा था। वीरवार को इनकी मौत हो गई। शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
मेडिसिन विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दौरान लोगों को खेतों और जंगलों में काम करने से जाने से पूर्व सावधानी बरतनी चाहिए। इससे वह इस रोग की चपेट में आने से बच सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर मरीजों को बुखार संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत अस्पताल में उपचार के लिए आना चाहिए। स्क्रब टायफस की चपेट में युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक आ रहे हैं। अस्पताल में सबसे पहले 19 साल की लड़की की इस बीमारी से मौत हुई थी। अब एक बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
रोग के लक्षण
बुखार 104 से 105 तक जा सकता है
जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना
शरीर में अकड़न होना या शरीर टूटा हुआ लगना
गर्दन और बाजू के नीचे कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना
बचाव
शरीर की सफाई का ध्यान रखें
घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
घर के चारों ओर घास खरपतवार नहीं उगने दें
घर के पास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
ऐसे होता है स्क्रब टायफस
यह रोग एक जीवाणु रिकेटशिया से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। यह खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों से पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस का बुखार पैदा करता है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस से मरीजों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा। आईजीएमसी में वीरवार को सुबह के वक्त एक 83 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई है, इसके बाद शाम के वक्त इसी बीमारी से एक महिला ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में लगातार बीमारी से मरीजों की मौत होने से हड़कंप मचा हुआ है। अस्पताल में इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या अब सात हो गई है।
अस्पताल में एक दिन के भीतर दो मरीजों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है। घुमारवीं बिलासपुर के रहने वाले बुजुर्ग मरीज को 24 सितंबर को अस्पताल में दाखिल किया था। मरीज का मेडिसिन वार्ड में लगातार चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चल रहा था। वीरवार को इनकी मौत हो गई। शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
विज्ञापन
मेडिसिन विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दौरान लोगों को खेतों और जंगलों में काम करने से जाने से पूर्व सावधानी बरतनी चाहिए। इससे वह इस रोग की चपेट में आने से बच सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर मरीजों को बुखार संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत अस्पताल में उपचार के लिए आना चाहिए। स्क्रब टायफस की चपेट में युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक आ रहे हैं। अस्पताल में सबसे पहले 19 साल की लड़की की इस बीमारी से मौत हुई थी। अब एक बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
रोग के लक्षण
बुखार 104 से 105 तक जा सकता है
जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना
शरीर में अकड़न होना या शरीर टूटा हुआ लगना
गर्दन और बाजू के नीचे कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना
बचाव
शरीर की सफाई का ध्यान रखें
घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
घर के चारों ओर घास खरपतवार नहीं उगने दें
घर के पास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
ऐसे होता है स्क्रब टायफस
यह रोग एक जीवाणु रिकेटशिया से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। यह खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों से पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस का बुखार पैदा करता है।