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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Amar Ujala Impact: Crackdown on spurious pesticides; the department will now sell affordable pesticides to orc

अमर उजाला इंपैक्ट: नकली कीनाशकों पर शिकंजा, अब बागवानों को सस्ती दवा बेचेगा विभाग, मंत्री जगत नेगी ने दी जान

Tue, 25 Aug 2026 06:56 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Aug 2026 06:56 PM IST
सार

 विधानसभा में ठियोग के कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने जानकारी दी कि बिना वैज्ञानिक प्रयोग वाली दवाएं इस्तेमाल करने से कई बार बागवानों को नुकसान होता है। इसलिए विश्वविद्यालय के निर्धारित छिड़काव कार्यक्रम का ही पालन किया जाना चाहिए।

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Amar Ujala Impact: Crackdown on spurious pesticides; the department will now sell affordable pesticides to orc
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागवानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक और फफूंदनाशक उपलब्ध करवाने के लिए अब बागवानी विभाग खुद दवाएं बेचेगा और इन्हें बाजार के खुदरा मूल्य से कम दर पर उपलब्ध करवाया जाएगा। विभाग से ली गई दवा खराब निकली तो इसकी जिम्मेदारी भी ली जाएगी। विधानसभा में ठियोग के कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने यह जानकारी दी। कहा कि बिना वैज्ञानिक प्रयोग वाली दवाएं इस्तेमाल करने से कई बार बागवानों को नुकसान होता है। इसलिए विश्वविद्यालय के निर्धारित छिड़काव कार्यक्रम का ही पालन किया जाना चाहिए।

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मंगलवार को राठौर ने कहा कि हिमाचल की करीब पांच हजार करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती लागत, महंगी मजदूरी और घटते उत्पादन के दबाव में है। ऐसे में एप्पल स्कैब, मार्सोनिना और अल्टरनेरिया जैसी बीमारियों के साथ घटिया दवाओं की शिकायतें बागवानों की परेशानी बढ़ा रही हैं और विभाग को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए। राठौर ने विदेशों से आने वाली दवाओं, नर्सरी और पौध सामग्री को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड दवाओं को प्रमाणित करता है। विदेशों में प्रतिबंधित दवाओं के यहां इस्तेमाल और उनकी गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने फर्जी क्वारंटीन प्रमाणपत्रों, विदेशों में अप्रचलित किस्मों के हिमाचल आने और अज्ञात वायरस के देश में पहुंचने की आशंका जताते हुए सवाल किया कि कहीं वायरस जानबूझकर फैलाने के पीछे कोई बड़ी विदेशी साजिश तो नहीं हो रही। विदेशी पौध सामग्री की गुणवत्ता, प्रमाणपत्र और वायरस की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

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राठौर ने सेब को लंबोतरा आकार और अच्छा रंग देने के लिए इस्तेमाल किए गए पीजीआर पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेशी कंपनी का यह उत्पाद करीब 16 हजार रुपये प्रति लीटर तक बिका।इसके इस्तेमाल से कई जगह सेब झड़ने की शिकायत आई और इसमें यहां छेड़छाड़ या मिलावट की आशंका है। मामले की जांच सतर्कता विभाग को दी गई है, जिसकी समयबद्ध जांच और दोषी फर्मों व आपूर्तिकर्ताओं पर कार्रवाई की मांग की गई। वहीं, नेगी ने कहा कि पीजीआर का इस्तेमाल बड़े बागवान पहले से करते रहे हैं और शुरुआत में इससे अच्छे गुणवत्तापूर्ण फल भी आए, लेकिन अब नकली पीजीआर से बागवान धोखा खा रहे हैं।

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संभव है कि कुछ बड़े बागवान इसकी तस्करी भी करते रहे हों। राठौर ने नौणी विश्वविद्यालय के छिड़काव कार्यक्रम में शामिल दवाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि मार्सोनिना और अल्टरनेरिया जैसी बीमारियां सामने आ रही हैं। केंद्रीय प्रमाणन व्यवस्था की भी जांच होनी चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि दवाओं का प्रमाणन केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड करता है और बाजार में कंपनियां बागवानों को कई तरह की दवाओं के लिए आकर्षित करती हैं, लेकिन बिना प्रयोग के दवा इस्तेमाल करने से नुकसान हो सकता है। मंत्री ने माना कि काफी पौध सामग्री बाहर से लानी पड़ रही है और कई कंटेनर वापस भेजे जा चुके हैं। नेगी ने कहा कि सरकार खुद नर्सरी तैयार कर रही है।

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