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हजारों होमगार्डों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बकाया एरियर भी मिलेगा

Wed, 11 Jan 2017 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 11 Jan 2017 10:55 AM IST
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Supreme Court verdict in favour of home guards

हिमाचल के हजारों होमगार्डों को बकाया एरियर मिलेगा। अवमानना याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को अपने पिछले आदेशों को छह सप्ताह के भीतर लागू करने के आदेश दिए हैं। यह अहम फैसला सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड और एल नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सुनाया है। 

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इस निर्णय के बाद राज्य सरकार को गृहरक्षकों को 11 मार्च 2015 से बकाया एरियर अदा करना होगा। ऐसा नहीं करने की सूरत में प्रदेश सरकार को एरियर राशि का भुगतान 12 प्रतिशत ब्याज सहित देना पड़ सकता है। इस मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव और विनोद शर्मा ने की।
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अधिवक्ता विनोद शर्मा ने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश के होमगार्ड जवानों विवेंद्र कुमार, राज कुमार, भीम चंद, महेंद्र सिंह, हरिदयाल सिंह, विजय कुमार, नानक चंद, रमेश चंद, जोगिंद्र सिंह, करतार सिंह, गोपाल शुक्ला, संजीव कुमार, सुंदर देवी, प्रकाश नेगी आदि ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिकाएं दायर की थीं।

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राज्य सरकार को पिछले आदेश को छह हफ्ते में लागू करने के आदेश

Supreme Court verdict in favour of home guards

उन्होंने गुहार लगाई थी कि चार मई 2016 को इसी न्यायालय के आदेश की अवमानना याचिका राजकुमार बनाम हिमाचल सरकार पर न्यायालय के आदेशों की उस तरह पालना नहीं की, जिस तरह से पंजाब सरकार ने की। पंजाब सरकार ने अपने होमगार्डों को 11 मार्च 2015 से एरियर दिया है, जबकि हिमाचल सरकार ने अपने होमगार्डों को एरियर 14 अक्तूबर 2015 से दिया गया है।

अधिवक्ता विनोद कुमार ने बताया कि चार मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि होमगार्डों का वेतन, बेसिक पे, ग्रेड पे, डीए और वाशिंग भत्तों को मिलाकर दिया जाए। इससे उनका वेतन प्रति माह 8400 रुपये से बढ़कर 17,134 रुपये हो गया था। हिमाचल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस अत्री, डीके ठाकुर और वरिंद्र शर्मा सर्वोच्च न्यायालय में पेश हुए।

प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि 11 मार्च 2015 से ही हिमाचल के होमगार्डों को भी एरियर देने का निर्णय किया गया है, जिसके लिए 37 करोड़ 21 लाख की राशि मंजूर भी की गई है। होमगार्डों को छह सप्ताह के भीतर इसका भुगतान कर दिया जाएगा। राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग काउंसेल वरिंद्र शर्मा ने भी पुष्टि की कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पिछले आदेशों को छह सप्ताह में लागू करने के आदेश दिए हैं। 

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