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हिमाचल प्रदेश: कृषि और बागवानी विवि में कुलपतियों की नियुक्ति से जुड़ा संशोधन अधिनियम हाईकोर्ट ने किया रद्द

Thu, 27 Aug 2026 07:38 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 27 Aug 2026 07:38 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कृषि विवि पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपतियों की नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के संशोधन अधिनियम और नियमों को असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। 

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hp High Court strikes down amendment act related to appointment of vc at Agriculture, Horticulture University
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विवि पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपतियों की नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के संशोधन अधिनियम और नियमों को असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से 26 फरवरी 2026 को दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति पदों के लिए जारी किए गए दोनों विज्ञापनों को भी तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और कुलाधिपति (राज्यपाल) को निर्देश दिया कि दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया यूजीसी विनियम 2018 के तहत दोबारा शुरू की जाए। नई चयन समिति में यूजीसी अध्यक्ष का एक मनोनीत प्रतिनिधि शामिल होगा। विश्वविद्यालय से सीधे जुड़े अधिकारियों जैसे मुख्य सचिव को चयन समिति से बाहर रखा जाएगा। यदि आवश्यक हो तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के प्रतिनिधि को भी समिति में शामिल किया जा सकता है। खंडपीठ ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यूजीसी विनियमों के उल्लंघन पर राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए कानूनी बदलावों को अधिकार क्षेत्र से बाहर करार दिया।

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अदालत ने हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम, 2023 (2025 का अधिनियम संख्या 46) की धारा 23(4) और धारा 24 में किए गए संशोधनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से कुलपति की नियुक्ति को सरकार की सहायता और सलाह के अधीन करना यूजीसी अधिनियम 1956 और यूजीसी विनियम 2018 का उल्लंघन है, जो राज्य विधायिका की क्षमता से बाहर है। राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी नियम 2026 के नियम 2, 3 और 4 को भी असांविधानिक, अवैध और प्रारंभ से ही शून्य घोषित कर दिया गया है। ये नियम यूजीसी विनियम 2018 के विनियमन 7.3 के सीधे विरोध में पाए गए।
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संशोधनों को रद्द कर दिया
अदालत ने हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम, 2023 (2025 का अधिनियम संख्या 46) की धारा 23(4) और धारा 24 में किए गए संशोधनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से कुलपति की नियुक्ति को सरकार की सहायता और सलाह के अधीन करना यूजीसी अधिनियम 1956 और यूजीसी विनियम 2018 का उल्लंघन है, जो राज्य विधायिका की क्षमता से बाहर है। राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी नियम 2026 के नियम 2, 3 और 4 को भी असांविधानिक, अवैध और प्रारंभ से ही शून्य घोषित कर दिया गया है। ये नियम यूजीसी विनियम 2018 के विनियमन 7.3 के सीधे विरोध में पाए गए।

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 राज्य सरकार ने अधिनियम में किया था ये प्रावधान
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 2023 के संशोधन अधिनियम और 2026 के नियमों के माध्यम से कुलपति की नियुक्ति में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति बनाने और सरकार की सलाह व सहायता से नियुक्ति का प्रावधान किया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य सरकार की ओर से 2023 में किए गए संशोधन और 2026 में बनाए गए नियम यूजीसी विनियम 2018 का उल्लंघन करते हैं। संविधान के अनुच्छेद 246 और 254 के अनुसार, उच्च शिक्षा के मानकों लिस्ट -1 एंट्री 66) पर संसद की ओर से बनाया गया केंद्रीय कानून (यूजीसी) राज्य के कानूनों पर प्राथमिकता रखता है।

राज्य सरकार ने दिया यह तर्क
राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि दोनों कृषि विश्वविद्यालय हैं और इन्हें यूजीसी से वित्तीय सहायता नहीं मिलती। विश्वविद्यालय राज्य सरकार और आईसीएआर के अनुदान से संचालित होते हैं, इसलिए इन पर यूजीसी के नियम लागू नहीं होने चाहिए। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि यूजीसी विनियम 2018 राज्य विश्वविद्यालयों पर भी लागू होते हैं। संसद के कानून के विपरीत बनाया गया कोई भी राज्य नियम सांविधानिक रूप से अमान्य है।

यह था नियम
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से संचालित विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल की ओर से यूजीसी नियमों के तहत गठित सर्च कमेटी की सिफारिश पर की जाती है। इसमें कुलपति के चयन के लिए सर्च कमेटी बनाई जाती है। जिस विवि में कुलपति की नियुक्ति की जानी है, इस कमेटी में उससे जुड़े किसी व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाता। कमेटी में यूजीसी का प्रतिनिधि होना भी अनिवार्य है। सर्च कमेटी की ओर से कुलपति के लिए नाम सुझाए जाते हैं, जिसके बाद राज्यपाल की ओर से नियुक्ति की जाती है।

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