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Shimla News: पहाड़ी कविताओं का संकलन पुस्तक में प्रकाशित करेगा जिला प्रशासन
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अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के तहत आयोजित पहाड़ी कवि सम्मेलन में उपायुक्त ने की घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के तहत पहाड़ी कवि सम्मेलन में प्रस्तुत पहाड़ी कविताओं का संकलन तैयार कर पुस्तक के रूप में जिला प्रशासन प्रकाशित करेगा। सम्मेलन के दूसरे दिन उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि इस पुस्तक को प्रदेश के विभिन्न पुस्तकालयों में उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग पहाड़ी साहित्य की समृद्ध परंपरा से परिचित हो सकें। उपायुक्त ने कहा कि पहाड़ी भाषा और साहित्य हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है तथा इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। साहित्य सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए सभी साहित्यकारों और कवियों से उनकी रचनाएं मांगी जाएगी। कवि सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। दूसरे दिन डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. मस्तराम शर्मा, डॉ. सूरत ठाकुर, डॉ. करम सिंह, डॉ. शंकर वशिष्ठ, त्रिलोक सूर्यवंशी, प्रताप प्रशार, राम लाल पाठक, अशोक दर्द, उमा ठाकुर नढाइक और कृष्ण चंद महादेविया सहित अन्य कवियों ने पहाड़ी भाषा में स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के तहत पहाड़ी कवि सम्मेलन में प्रस्तुत पहाड़ी कविताओं का संकलन तैयार कर पुस्तक के रूप में जिला प्रशासन प्रकाशित करेगा। सम्मेलन के दूसरे दिन उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि इस पुस्तक को प्रदेश के विभिन्न पुस्तकालयों में उपलब्ध करवाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग पहाड़ी साहित्य की समृद्ध परंपरा से परिचित हो सकें। उपायुक्त ने कहा कि पहाड़ी भाषा और साहित्य हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है तथा इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। साहित्य सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए सभी साहित्यकारों और कवियों से उनकी रचनाएं मांगी जाएगी। कवि सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। दूसरे दिन डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. मस्तराम शर्मा, डॉ. सूरत ठाकुर, डॉ. करम सिंह, डॉ. शंकर वशिष्ठ, त्रिलोक सूर्यवंशी, प्रताप प्रशार, राम लाल पाठक, अशोक दर्द, उमा ठाकुर नढाइक और कृष्ण चंद महादेविया सहित अन्य कवियों ने पहाड़ी भाषा में स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं।