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Shimla News: कचरा संग्रहण पर नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट तलब
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प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश बाद रिपोर्ट तैयार करने में जुटा बोर्ड, सेवा कवरेज, यूजर चार्ज और निगरानी तंत्र को लेकर देना होगा अदालत में जवाब
नगर निगम समेत शहरी निकायों को सिस्टम सुधारने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर जमीनी निगरानी और सेवा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है। अदालत ने शिमला नगर निगम और प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी शहरी निकायों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सेवा कवरेज, यूजर चार्ज और निगरानी तंत्र को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने साफ किया कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं हर घर तक सेवा पहुंचने और उसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित होनी चाहिए। सुनवाई में यह भी सामने आया कि कचरा प्रबंधन प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए गारबेज आईडी प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक घर को यूनिक आईडी दी जा रही है जिससे यह पता लगाया जा सके कि किन घरों तक कचरा संग्रहण सेवा पहुंच रही है और कौन यूजर चार्ज नहीं दे रहा। अब तक प्रदेश में करीब 1.98 लाख गारबेज आईडी तैयार की जा चुकी हैं। अदालत ने इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने शहरी विकास विभाग और नगर निगम शिमला सहित अन्य निकायों को निर्देश दिए हैं कि कचरा संग्रहण, परिवहन और निस्तारण पर होने वाले वास्तविक खर्च का आकलन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही मैटीरियल रिकवरी सुविधा और अन्य ढांचे के उन्नयन के लिए आवश्यक फंड तथा वार्षिक संचालन लागत का भी पूरा ब्योरा दें। अदालत ने कहा कि कचरा प्रबंधन सेवाओं को मजबूत करने के लिए तकनीकी उपायों को तेजी से लागू किया जाए। क्लस्टर आधारित बायोगैस प्लांट और अन्य वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की दिशा में हो रही प्रगति पर भी रिपोर्ट मांगी है, ताकि शिमला जैसे शहरों में कचरे का दबाव कम किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में भी अदालत ने संकेत दिए हैं कि पंचायत स्तर पर बनाई व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए जिससे शहरी क्षेत्रों पर अतिरिक्त बोझ कम हो।
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कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी
हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई और अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से नाहन के सैनवाला क्षेत्र में नदी में फेंकी बोतलों और पैकेजिंग कचरे के मामले में क्या जांच हुई, किन इकाइयों की भूमिका सामने आई और उनके खिलाफ क्या दंडात्मक कदम उठाए, इसकी जानकारी अदालत ने मांगी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषक भुगतान करें सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जाए और दोषी इकाइयों से जुर्माना वसूला जाए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लग सके।
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नगर निगम समेत शहरी निकायों को सिस्टम सुधारने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर जमीनी निगरानी और सेवा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है। अदालत ने शिमला नगर निगम और प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी शहरी निकायों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सेवा कवरेज, यूजर चार्ज और निगरानी तंत्र को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने साफ किया कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं हर घर तक सेवा पहुंचने और उसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित होनी चाहिए। सुनवाई में यह भी सामने आया कि कचरा प्रबंधन प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए गारबेज आईडी प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक घर को यूनिक आईडी दी जा रही है जिससे यह पता लगाया जा सके कि किन घरों तक कचरा संग्रहण सेवा पहुंच रही है और कौन यूजर चार्ज नहीं दे रहा। अब तक प्रदेश में करीब 1.98 लाख गारबेज आईडी तैयार की जा चुकी हैं। अदालत ने इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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कोर्ट ने शहरी विकास विभाग और नगर निगम शिमला सहित अन्य निकायों को निर्देश दिए हैं कि कचरा संग्रहण, परिवहन और निस्तारण पर होने वाले वास्तविक खर्च का आकलन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही मैटीरियल रिकवरी सुविधा और अन्य ढांचे के उन्नयन के लिए आवश्यक फंड तथा वार्षिक संचालन लागत का भी पूरा ब्योरा दें। अदालत ने कहा कि कचरा प्रबंधन सेवाओं को मजबूत करने के लिए तकनीकी उपायों को तेजी से लागू किया जाए। क्लस्टर आधारित बायोगैस प्लांट और अन्य वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की दिशा में हो रही प्रगति पर भी रिपोर्ट मांगी है, ताकि शिमला जैसे शहरों में कचरे का दबाव कम किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में भी अदालत ने संकेत दिए हैं कि पंचायत स्तर पर बनाई व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए जिससे शहरी क्षेत्रों पर अतिरिक्त बोझ कम हो।
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कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी
हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई और अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से नाहन के सैनवाला क्षेत्र में नदी में फेंकी बोतलों और पैकेजिंग कचरे के मामले में क्या जांच हुई, किन इकाइयों की भूमिका सामने आई और उनके खिलाफ क्या दंडात्मक कदम उठाए, इसकी जानकारी अदालत ने मांगी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषक भुगतान करें सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जाए और दोषी इकाइयों से जुर्माना वसूला जाए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लग सके।