कैसे नियमित हो जाएंगे कब्जे, सरकार ने कर दी बहुत बड़ी चूक
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चुनावी साल में टीसीपी संशोधन विधेयक मंजूर करवाकर सूबे में हजारों अवैध भवनों को नियमित कराने में कामयाब रही हिमाचल सरकार के लिए जंगल की जमीन बांटना इतना आसान नहीं। वन भूमि पर पांच बीघा तक के कब्जाधारकों को जमीन देने के लिए बनाई गई अंतरिम पॉलिसी को जानकार चुनावी शिगूफा बता रहे हैं। केंद्र के कानूनों से हिमाचल सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। एक इंच जमीन भी केंद्र की मंजूरी के बिना नहीं दी जा सकती।
इस बात को खुद राजस्व मंत्री एवं अवैध कब्जों को लेकर गठित कमेटी के अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर भी मानते हैं। कौल सिंह कहते हैं कि जिन मामलों में वन संरक्षण अधिनियम 1980 और अनुसूचित जाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के अंतर्गत स्वीकृति अनिवार्य है, उनको भारत सरकार से उठाया जाएगा ताकि मानवीय आधार पर ऐसे मामलों में छूट मिल सके।
रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस में ही छूट देती है केंद्र सरकार
रिटायर्ड आईएफएस केके गुप्ता कहते हैं कि यह सरकार का पॉलिटिकल स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं है। सरकार लोगों को संदेश दे रही है कि वह कोशिश कर रही है। अगर केंद्र सरकार नियमों के चलते मांग को ठुकराती है तो वह केंद्र को दोषी ठहरा सकती है। चुनावी साल में प्रदेश के करीब दस हजार से ज्यादा परिवारों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए सरकार अब पॉलिसी की बात कह रही है।
गुप्ता कहते हैं कि किसी प्रोजेक्ट या सामाजिक उपयोग के लिए किए जाने वाले कार्य के लिए भी राज्य सरकार को केंद्र से ही वन क्षेत्र में भू उपयोग की मंजूरी लेनी होती है। केंद्र सरकार रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस में ही अवैध कब्जे को रेगुलर कर सकती है। लेकिन इसके लिए कई तरह की शर्तों को पूरा करना पड़ता है।
क्या कहता है केंद्र का कानून
फॉरेस्ट राइट एक्ट और फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट के तहत देशभर में वन भूमि पर किसी भी तरह की गतिविधि को नियंत्रित किया जाता है। चूंकि, यह केंद्र सरकार का एक्ट है और इस एक्ट को प्रदेश में लागू करते समय किसी भी तरह का संशोधन बिना केंद्र की मंजूरी नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा था- ईडी से जांच कराओ
वन भूमि कब्जों पर हाईकोर्ट ने सरकार को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से इसकी जांच कराओ। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक ईडी को जांच के लिए पत्र तक नहीं लिखा गया है। आदेश न मानने पर मुख्य सचिव और पीसीसीएफ को हाईकोर्ट फटकार तक लगा चुका है। आदेश की अनुपालना कर अब 28 फरवरी तक स्टेट्स बताने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने बनाई हाई पावर कमेटी
हाईकोर्ट की सख्ती के बीच सरकार ने वन भूमि पर अवैध कब्जों को नियमित कराने के लिए राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी बना दी। कई बैठकों के बाद अब कमेटी ने कब्जाधारकों को राहत पहुंचाने के लिए अंतरिम पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी को अब कैबिनेट से अनुमति के बाद 28 फरवरी को हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा।