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ज्ञान भारतम एप पर संरक्षित करें पांडुलिपियां : नरवाल
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मुख्य और अंदर के दो पृष्ठ करने होंगे अपलोड
धरोहरों को डिजिटल रूप से किया जाएगा सुरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसमें ज्ञान भारतम मिशन का गठन किया है। इसके तहत प्राचीन पांडुलिपियों और अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
जिला भाषा अधिकारी शिमला सरोजना नरवाल ने बताया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तहत हिमाचल के भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा सर्वेक्षण कर पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। अब इन सभी धरोहरों को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। इसके लिए ज्ञान भारतम एप लाॅन्च किया है। यदि जिले में किसी भी व्यक्ति के घर या मंदिर में पांडुलिपियां हैं तो वह एप के माध्यम से अपनी पांडुलिपियों का पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए पहले एप को फोन में डाउनलोड करके लॉगइन करें। इस प्रक्रिया में पांडुलिपि के मुख्य पृष्ठ और अंदर के दो तीन पृष्ठों की तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। इसके बाद विभाग के अधिकारी स्वयं पांडुलिपि के मालिक से संपर्क करेंगे।
खास बात यह है कि पांडुलिपि उनके मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेगी और साथ ही उनका संरक्षण भी किया जाएगा। भाषा एवं संस्कृति विभाग के राज्य संग्रहालय शिमला द्वारा खराब हो चुकी पांडुलिपियों का रासायनिक उपचार द्वारा संरक्षण किया जाएगा। सरोजना नरवाल ने सभी लोगों, निजी संस्थानों, संगठनों, मंदिरों की कमेटियों से आग्रह है कि अपने पुराने दस्तावेज, हस्तलिपि, पांडुलिपि, भोज पत्र जो कम से कम 75 वर्ष पुराने हो, वह इसमें जुड़ सकते हैं। लोगों से अपील की है कि इन प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित करें ताकि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को इसका लाभ हो सके।
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धरोहरों को डिजिटल रूप से किया जाएगा सुरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसमें ज्ञान भारतम मिशन का गठन किया है। इसके तहत प्राचीन पांडुलिपियों और अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
जिला भाषा अधिकारी शिमला सरोजना नरवाल ने बताया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तहत हिमाचल के भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा सर्वेक्षण कर पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। अब इन सभी धरोहरों को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। इसके लिए ज्ञान भारतम एप लाॅन्च किया है। यदि जिले में किसी भी व्यक्ति के घर या मंदिर में पांडुलिपियां हैं तो वह एप के माध्यम से अपनी पांडुलिपियों का पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए पहले एप को फोन में डाउनलोड करके लॉगइन करें। इस प्रक्रिया में पांडुलिपि के मुख्य पृष्ठ और अंदर के दो तीन पृष्ठों की तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। इसके बाद विभाग के अधिकारी स्वयं पांडुलिपि के मालिक से संपर्क करेंगे।
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खास बात यह है कि पांडुलिपि उनके मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेगी और साथ ही उनका संरक्षण भी किया जाएगा। भाषा एवं संस्कृति विभाग के राज्य संग्रहालय शिमला द्वारा खराब हो चुकी पांडुलिपियों का रासायनिक उपचार द्वारा संरक्षण किया जाएगा। सरोजना नरवाल ने सभी लोगों, निजी संस्थानों, संगठनों, मंदिरों की कमेटियों से आग्रह है कि अपने पुराने दस्तावेज, हस्तलिपि, पांडुलिपि, भोज पत्र जो कम से कम 75 वर्ष पुराने हो, वह इसमें जुड़ सकते हैं। लोगों से अपील की है कि इन प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित करें ताकि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को इसका लाभ हो सके।
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