स्थायी नीति की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर गरजे आउटसोर्स कर्मचारी
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स्थायी नीति बनाने की मांग को लेकर बुधवार को सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। राजधानी शिमला के ओल्ड बस स्टैंड से लेकर विधानसभा गेट तक रैली निकालते हुए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को पांच सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा गया।
हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के बैनर तले स्वास्थ्य, बिजली, आईपीएच, कृषि, खाद्य एवं आपूर्ति निगम, वन, एसएलडीसी, प्रदेश सचिवालय, वित्त, परिवहन, शिक्षा, आईजीएमसी और केएनएच सहित कई अन्य विभागों के सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों ने रैली में भाग लिया। रैली को सीटू नेता डॉ. कश्मीर ठाकुर, जगत राम, प्रेम गौतम, विजेंद्र मेहरा, हिमाचल किसान सभा महासचिव व ठियोग के विधायक राकेश सिंघा, दलीप कायथ, यूनियन अध्यक्ष
यशपाल, महासचिव नोख राम, दलीप, विरेंद्र लाल, संजय, चुनी, रजवान, नरेंद्र देष्टा, दिनेश, हिमी, रीता, हेमलता, विद्या गाजटा, सुरेंद्रा, पवन, मोहिंद्र और विपन ने संबोधित किया। प्रेम गौतम, विजेंद्र मेहरा, यशपाल, नोख राम, विरेंद्र, दलीप व मदन ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिल कर उन्हें पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष यशपाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार की आउटसोर्स कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेश में आंदोलन तेज होगा। सरकार लगातार आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रति सौतेला व्यवहार अपना रही है व उनकी अनदेखी की जा रही है। उनके लिए न तो कोई स्थायी नीति बनाई जा रही है और न ही उन्हें नियमित किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के समान कार्य के समान वेतन के निर्णय के बावजूद उसे लागू नहीं किया जा रहा है।
आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा श्रम कानूनों की खुली अवहेलना की जा रही है और प्रदेश सरकार मौन है। इससे स्पष्ट है कि यह सरकार शोषण को बढ़ावा दे रही है। यूनियन महासचिव नोख राम ने मांग करते हुए कहा कि आउटसोर्स कर्मियों को 18 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए।
उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार के आईपीएच मंत्री व मुख्यमंत्री विधानसभा में आउटसोर्स कर्मियों के खिलाफ वक्तव्य जारी करके उनका अपमान कर रहे हैं, जिसे कतई सहन नहीं किया जाएगा। उनके द्वारा आउटसोर्स कर्मियों के लिए कोई नीति न बनाने की बात से पूर्णत: सिद्ध हो रहा है कि वर्तमान सरकार भूतपूर्व सरकार से किसी मामले में भी भिन्न नहीं है व कर्मचारी विरोधी है।
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे काम करवाया जा रहा है। इन्हें न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। ओवरटाइम का भुगतान न करके तथा संख्या से कम कर्मचारी भर्ती करके उनका भारी शोषण जारी है।
उन्हें ईपीएफ, मेडिकल, बोनस, ग्रेच्युटी, छुट्टियों की सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। सरकार कर्मचारियों के लिए नीति बनाने के बजाय इनकी संख्या को 42 हजार के बजाए 10 हजार बताकर गुमराह करने की कोशिश कर रही है।