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Himachal: मर्ज स्कूलों में विद्यार्थियों से नहीं ली जाएगी दाखिला फीस, निदेशालय ने जारी की एसओपी

Tue, 24 Mar 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 24 Mar 2026 05:00 AM IST
सार

मर्ज किए गए लड़कों और लड़कियों के स्कूलों में विद्यार्थियों से दोबारा दाखिला फीस नहीं ली जाएगी। 

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No Admission Fees to be Charged from Students in Merged Schools; Directorate Issues SOP
हिमाचल सरकारी स्कूल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मर्ज किए गए लड़कों और लड़कियों के स्कूलों में विद्यार्थियों से दोबारा दाखिला फीस नहीं ली जाएगी। सभी विद्यार्थी स्वतः ही नए को-एजुकेशनल स्कूल में स्थानांतरित माने जाएंगे। किसी भी छात्र को विषय या स्ट्रीम बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। यदि छात्र संख्या अधिक है तो दोनों परिसरों का उपयोग किया जाएगा। बेहतर सुविधाओं वाले परिसर में 11वीं-12वीं की कक्षाएं और दूसरे में 6वीं से 10वीं तक की कक्षाएं चलेंगी। वहीं, यदि सभी कक्षाएं एक ही परिसर में चल सकती हैं, तो दूसरे भवन को छात्रावास या अन्य छात्र हित सुविधाओं में बदला जा सकेगा।

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स्कूल स्तर पर लैंगिक भेदभाव खत्म होगा
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के लड़कों और लड़कियों के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के विलय के बाद अब इनके सुचारु संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कि गए हैं। सरकार का मानना है कि कोएजूकेशनल व्यवस्था से स्कूल स्तर पर लैंगिक भेदभाव खत्म होगा और विद्यार्थियों में समानता, आपसी सम्मान और सहयोग की भावना विकसित होगी। यह व्यवस्था विद्यार्थियों को भविष्य के सामाजिक और पेशेवर माहौल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगी। विलय के बाद अब अलग-अलग बॉयज और गर्ल्स स्कूलों की पहचान समाप्त हो जाएगी। सभी कार्य एक ही नाम से संचालित होंगे और आधिकारिक पत्राचार भी उसी के तहत किया जाएगा।

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सभी पद अब एकीकृत संस्थान के तहत आएंगे
दोनों स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सभी पद अब एकीकृत संस्थान के तहत आएंगे। इनका नियंत्रण संबंधित स्कूल प्राचार्य के पास होगा। सभी भवन, लैब, लाइब्रेरी, आईसीटी संसाधन और अन्य संपत्तियां एकीकृत नियंत्रण में रहेंगी। भौतिक सत्यापन के बाद स्टॉक रजिस्टर भी अपडेट किया जाएगा। विलय के बाद स्कूल एक ही यू डाइस कोड से संचालित होंगे। सभी बैंक खाते और वित्तीय रिकॉर्ड भी एकीकृत किए जाएंगे। डीडीओ कोड और कोषागार संबंधी प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। विलय के दौरान विद्यार्थियों के मानसिक और सामाजिक अनुकूलन को ध्यान में रखते हुए विशेष काउंसलिंग और सहयोग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर छात्राओं, दिव्यांग बच्चों और कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों की जरूरतों का ध्यान रखने को कहा गया है।

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योजनाओं के लाभ जारी रहेंगे
पीएम श्री स्कूल, मुख्यमंत्री आदर्श विद्यालय योजना और ज्ञानोदय जैसी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ भी पूर्ववत जारी रहेंगे। विलय प्रक्रिया की निगरानी और समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर समन्वय समिति गठित की गई है। इसमें सेकेंडरी, एलिमेंट्री और क्वालिटी शिक्षा के उपनिदेशक और संबंधित स्कूल के प्राचार्य शामिल होंगे। यह समिति आवश्यकतानुसार निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी। दोनों स्कूलों के सभी रिकॉर्ड को एकीकृत कर सुव्यवस्थित तरीके से रखा जाएगा, साथ ही स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) का पुनर्गठन आरटीई नियमों के तहत किया जाएगा।

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