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हिमाचल मंत्रिमंडल और कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल के संकेत

Sat, 02 Apr 2016 11:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 02 Apr 2016 11:58 AM IST
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 Many ministers may be changed in hp govt after uttrakhand political crisis.
ढीले पेंच कसने के क्रम में कुछ मंत्री बदले जा सकते हैं। संगठन के कुछ महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव के संकेत हैं। - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड संकट के अनुभवों के बाद कांग्रेस आलाकमान हिमाचल प्रदेश के मामले में कोई चूक नहीं करना चाहती। फिलहाल हिमाचल सरकार का संकट टल गया है। बजट के दौरान सरकार गिराने की कोशिशें विफल हो गईं और बजट पारित हो गया।

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इससे सबक लेकर आलाकमान खतरा भांपकर पूर्व तैयारी के प्रयासों में जुट गया है। आलाकमान ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू समेत तमाम प्रमुख नेताओं के साथ मैराथन मंथन का निर्णय लिया है।
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ढीले पेंच कसने के क्रम में कुछ मंत्री बदले जा सकते हैं। संगठन के कुछ महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव के संकेत हैं। दिल्ली में शनिवार को होने वाली अहम बैठक में कांग्रेस महासचिव और हिमाचल की प्रभारी अंबिका सोनी संगठन पर रिपोर्ट लेंगी।

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बैठक के लिए दिल्‍ली पहुंचे नेता, होंगे कई बड़े फैसले

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बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष के अलावा मंत्री कौल सिंह ठाकुर, विद्या स्टोक्स, मुकेश अग्निहोत्री और जीएस बाली को भी बुलाया गया है।

इस बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष के अलावा मंत्री कौल सिंह ठाकुर, विद्या स्टोक्स, मुकेश अग्निहोत्री और जीएस बाली को भी बुलाया गया है। अग्निहोत्री दिल्ली पहुंच चुके हैं। मुख्यमंत्री और कौल सिंह ठाकुर शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे।

कांग्रेस आलाकमान वर्तमान में सरकार गिराने की कोशिशों को मात देने के अलावा अगले साल होने वाले चुनाव के लिए रणनीति तय कर रहा है। हिमाचल में अगले साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होंगे। इसलिए आलाकमान तरकश के तमाम तीरों को आजमाने के मूड में है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रवर्तन निदेशालय में मामला चल रहा है। कांग्रेस आलाकमान को आशंका है कि केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री पर शिकंजा कस सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए मैराथन मंथन में रणनीति बनाई जा सकती है।

सीएम के साथ है आलाकमान

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

आलाकमान वीरभद्र सिंह को समर्थन देता रहा है। इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री पर हो रही कार्रवाई को सियासी बदले की कार्रवाई बताकर केंद्र पर आरोप जड़े गए। मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रहे मामले में प्रवर्तन निदेशालय के अगले कदम से सियासत प्रभावित हो सकती है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समर्थन में 32 विधायकों ने हस्ताक्षर किए। चार निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन कांग्रेस को मिल रहा है। कांग्रेस के दो विधायक शिमला में मौजूद नहीं रहने के कारण हस्ताक्षर नहीं कर पाए थे। उनका भी समर्थन मुख्यमंत्री को प्राप्त है। इस तरह मुख्यमंत्री ने आलाकमान को स्पष्ट कर दिया है कि उनके पक्ष में 38 विधायक हैं। राज्य में बहुमत के लिए 35 विधायकों की जरूरत है।

भाजपा पूरी तैयारी के बाद उठाएगी कदम
उत्तराखंड के मामले में उलझी भाजपा हिमाचल में पूरी तैयारी के बाद ही उथल-पुथल के लिए कोई कदम उठाना चाहती है। कांग्रेस विधायकों की एकजुटता से बजट पारित कराने के दौरान सरकार गिराने की कोशिश सफल नहीं हो पाई। भाजपा ने दावा किया था कि कांग्रेस के कुछ विधायक उसके संपर्क में हैं। लेकिन कांग्रेस के विधायकों ने एकजुटता दिखाई है।

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