पंद्रह साल बाद नजदीकियों में बदलने लगीं शांता-धूमल के बीच की दूरियां
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इस बार लोकतंत्र का महापर्व जहां नेताओं के जहरीले बयानों से भीगा, वहीं कई दिग्गजों में घुली दशकों पुरानी राजनीतिक कड़वाहट चुनावी मजबूरी के बीच मिठास में बदलती भी दिख रही है। भाजपा के दो बड़े राजनीतिक स्तंभ शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल डेढ़ दशक बाद दूरियों को पाटने की पहल कर रहे हैं।
हिमाचल में बतौर प्रदेश प्रभारी नरेंद्र मोदी की एंट्री के बाद शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल के बीच सियासी दूरियां बढ़ी थीं। वर्ष 2004 के बाद बिना निमंत्रण शांता कुमार कभी भी हमीरपुर में धूमल के किसी कार्यक्रम में नहीं गए। लेकिन, करीब 15 वर्ष बाद 26 अप्रैल को अनुराग ठाकुर के नामांकन के लिए शांता कुमार को धूमल का निमंत्रण मिला।
शांता कुमार भी निमंत्रण स्वीकार कर हमीरपुर पहुंचे। इस पहल के साथ दो दिग्गजों के बीच नए सियासी रिश्ते शुरू हुए। चुनाव से पहले भी धूमल ने शांता के घर पर पहुंचकर रिश्तों की नई बिसात बिछाने की कोशिश की थी जिसे शांता कुमार ने परवान चढ़ाया।
नए रिश्तों का कारपेट बिछने के बाद शांता कुमार ने भी अनुराग ठाकुर को उभरता हुआ भविष्य का युवा नेतृत्व बताया। अनुराग की जीत के लिए चुनाव के अंतिम समय में एक बार फिर से सुरेश चंदेल को भाजपा में वापस लौटने का ऑफर दिया।
अरसे बाद धूमल और अनुराग भी इस चुनाव में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की तारीफों के पुल बांधते दिखे। तारीफ सुनने के बाद नड्डा ने भी यूपी की चुनावी व्यस्तता से दो दिन चुराकर हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को देने की बात कही। उधर, कांग्रेस में वीरभद्र-सुक्खू और बाली-सुधीर के बीच भी सियासी मिठास घोलने की काफी कोशिश हुई।
शांता ने रूठों को मनाया और पसीना भी बहाया
शांता कुमार 84 की उम्र में खूब पसीना बहा रहे हैं। कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्रों के 17 विस क्षेत्रों में दो बार प्रचार करने के साथ चारों सीटों पर शांता अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं। मंडी और कांगड़ा की सभी बड़ी रैलियों में शांता पहुंचे।
शांता रोजाना न्यूनतम 5 कार्यक्रमों में स्टार प्रचारक की तरह प्रचार कर रहे हैं। रूठों को मनाने में भी शांता कामयाब रहे। महेंद्र नाथ सोफत, प्रवीण शर्मा, बलदेव ठाकुर सहित कई पुराने नेताओं की एंट्री करवाने की शांता की कोशिश सफल रही।