फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Kidney transplant will not be able to start in IGMC due to non matching of blood group

आईजीएमसी में ब्लड ग्रुप मैच न होने पर नहीं हो सकेंगे किडनी ट्रांसप्लांट

Tue, 27 Aug 2019 01:05 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 27 Aug 2019 01:05 PM IST
विज्ञापन
Kidney transplant will not be able to start in IGMC due to non matching of blood group
फाइल फोटो

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हो गया है, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच न होने पर किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा अभी यहां नहीं मिल पाएगी। आईजीएमसी में मरीज के प्लाज्मा फेरेसिस विधि से एंटी बॉडिज को फिल्टर करने जैसी सुविधा नहीं है।

विज्ञापन


न ही इसको लेकर पर्याप्त संसाधन हैं। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी  विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय विक्रांत का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट तो किया जा सकता है, लेकिन सुविधा शुरू होने में थोड़ा समय लगेगा। हालांकि, बड़े अस्पतालों में भी केवल 2 से 3 फीसदी ही ट्रांसप्लांट इस तरीके से किए जा रहे हैं।
विज्ञापन


प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में 12 अगस्त को दो सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे। बड़े शहरों की तर्ज पर किए जाने वाले ट्रांसप्लांट को लेकर प्रबंधन सरकार के साथ मिलकर इस तरह की कवायद शुरू नहीं कर पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मौजूदा समय में प्रबंधन केवल लाइव डोनेशन पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसके पीछे ट्रेंड डॉक्टरों की टीम न होना भी मुख्य वजह है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अभी बाकी के ऑपरेशन के लिए भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टर आएंगे।

इन्हीं डॉक्टरों की निगरानी में यह ट्रांसप्लांट होंगे। ऐसे में प्रबंधन अब केवल अस्पताल में आए मरीजों के डोनर को किडनी दान करने को लेकर प्रोत्साहित कर रहा है।

मेडिसन पर आता है 5 से 6 लाख का खर्च

ब्लड ग्रुप मैच न होने पर किडनी ट्रांसप्लांट तो संभव है, लेकिन इसमें दवाइयों पर करीब पांच से छह लाख रुपये का खर्चा आता है। इस कारण मरीजों पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है। 

सर्जन की भी है कमी
अस्पताल में इस तरह की सुविधा तो शुरू की जा सकती है, लेकिन दूसरी ओर ट्रेंड सर्जन न होना भी एक समस्या है। बीस से पच्चीस के करीब ट्रांसप्लांट अभी भी एम्स के डॉक्टरों की टीम की निगरानी में किए जाने है। ऐसे में अपने स्तर पर इस तरह के ट्रांसप्लांट करने में अभी समय लगेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed