आईजीएमसी में ब्लड ग्रुप मैच न होने पर नहीं हो सकेंगे किडनी ट्रांसप्लांट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हो गया है, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच न होने पर किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा अभी यहां नहीं मिल पाएगी। आईजीएमसी में मरीज के प्लाज्मा फेरेसिस विधि से एंटी बॉडिज को फिल्टर करने जैसी सुविधा नहीं है।
न ही इसको लेकर पर्याप्त संसाधन हैं। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय विक्रांत का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट तो किया जा सकता है, लेकिन सुविधा शुरू होने में थोड़ा समय लगेगा। हालांकि, बड़े अस्पतालों में भी केवल 2 से 3 फीसदी ही ट्रांसप्लांट इस तरीके से किए जा रहे हैं।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में 12 अगस्त को दो सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे। बड़े शहरों की तर्ज पर किए जाने वाले ट्रांसप्लांट को लेकर प्रबंधन सरकार के साथ मिलकर इस तरह की कवायद शुरू नहीं कर पाया है।
मौजूदा समय में प्रबंधन केवल लाइव डोनेशन पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसके पीछे ट्रेंड डॉक्टरों की टीम न होना भी मुख्य वजह है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अभी बाकी के ऑपरेशन के लिए भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टर आएंगे।
इन्हीं डॉक्टरों की निगरानी में यह ट्रांसप्लांट होंगे। ऐसे में प्रबंधन अब केवल अस्पताल में आए मरीजों के डोनर को किडनी दान करने को लेकर प्रोत्साहित कर रहा है।
मेडिसन पर आता है 5 से 6 लाख का खर्च
ब्लड ग्रुप मैच न होने पर किडनी ट्रांसप्लांट तो संभव है, लेकिन इसमें दवाइयों पर करीब पांच से छह लाख रुपये का खर्चा आता है। इस कारण मरीजों पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
सर्जन की भी है कमी
अस्पताल में इस तरह की सुविधा तो शुरू की जा सकती है, लेकिन दूसरी ओर ट्रेंड सर्जन न होना भी एक समस्या है। बीस से पच्चीस के करीब ट्रांसप्लांट अभी भी एम्स के डॉक्टरों की टीम की निगरानी में किए जाने है। ऐसे में अपने स्तर पर इस तरह के ट्रांसप्लांट करने में अभी समय लगेगा।