हिमाचल के 12 शिक्षकों को मिलेगा राज्यस्तरीय पुरस्कार, शिक्षा के क्षेत्र में किए ये बेहतरीन काम
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हिमाचल के 12 शिक्षकों को इस साल राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार मिलेगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने पुरस्कार देने के लिए चुने शिक्षकों की सूची जारी कर दी है। पांच सितंबर को राजधानी शिमला स्थित राज्य अतिथिगृह पीटरहॉफ में राज्यपाल और मुख्यमंत्री शिक्षकों को सम्मानित करेंगे।
बीते साल के मुकाबले इस साल चार पुरस्कार कम दिए जाएंगे। निदेशालय पहुंचे आवेदनों में से सरकार को योग्य शिक्षक नहीं मिलने के चलते इस बार संख्या कम हो गई है। शिमला, मंडी और सिरमौर जिले से दो-दो शिक्षकों तथा कांगड़ा, सोलन, हमीरपुर, ऊना, चंबा, बिलासपुर से एक-एक शिक्षक का चयन हुआ है।
कुल्लू, लाहौल स्पीति, किन्नौर से एक भी शिक्षक चयनित नहीं हो पाया। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को एक साल का सेवा विस्तार दिया जाएगा।
नेशनल तक खेले डीपीई संतोष के तराशे खिलाड़ी
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला समरहिल के डीपीई संतोष चौहान वॉलीबाल, कबड्डी और फुटबाल जैसे खेल में करीब 60 प्रतिभाओं को तराश कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा चुके हैं। उन्होंने 2012 से बतौर एनसीसी ऑफिसर कई कैडेट तैयार किए हैं, जो स्टेट प्री आरडी और राष्ट्रीय आरडी कैंप में हिस्सा ले चुके हैं।
मूलतया चौपाल बमटा के कशाह गांव के रहने वाले संतोष चौहान ने 1997 में बतौर डीपीई शिक्षा विभाग में सेवाएं शुरू कीं। चौपाल के सराह स्कूल और उसके बाद नेरवा से करीब आधा दर्जन खिलाड़ियों को वॉलीबाल और कबड्डी का प्रशिक्षण देकर नेशनल तक पहुंचाया।
फिर घणाहट्टी से खो-खो में, अब समरहिल स्कूल में कई छात्र-छात्राओं को सुविधाओं के अभाव में खेल प्रशिक्षण देकर उन्हें नेशनल तक पहुंचाया।
स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों, एनसीसी के इवेंट और खेलों में हमेशा बेहतर करने के लिए प्रयासरत रहे। एनसीसी में उनके एक कैडेट मुकेश ने शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता था। हाल ही में बैडमिंटन में उनके खिलाड़ी ने नेशनल में पुरस्कार पाया है।
पूर्व मंत्री के पोते को भी मिलेगा शिक्षक सम्मान
राजकीय प्राथमिक पाठशाला संदौर में जेबीटी प्रदीप मुखिया का चयन पांच सितंबर को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए हुआ है। प्रदीप मुखिया ने शिक्षा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए शादी भी नहीं की है।
प्रदीप मुखिया के दादा पंडित पद्मदेव रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1952 में विधायक बने थे। वह सरकार में गृह मंत्री और शिक्षा, वन और स्वास्थ्य मंत्री सहित सांसद भी रह चुके हैं।
प्रदीप मुखिया का जन्म 21 अप्रैल, 1967 में बमनोली गांव में हुआ है। इनके पिता ब्रह्म देव मुखिया सेना में सेवाएं दे चुके हैं। प्रदीप ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव बमनोली, मिडल शिक्षा कुई, उच्च शिक्षा समरकोट और 12वीं रोहड़ू स्कूल से पूरी की है।
इसके बाद 1992 में शिक्षा क्षेत्र में आए। उन्होंने जहां भी सेवाएं दीं वहां अपने निजी खर्च से स्कूल भवनों और खेल मैदानों को सुधारने में बेहतरीन कार्य किया।जीवन के 27 साल जनसेवा और सरकारी स्कूलों में शिक्षा को बेहतर बनने के लिए दे दिए।
इन्होंने शादी भी नहीं की है। प्रदीप मुखिया ने संदौर स्कूल में जब ज्वाइनिंग दी थी तो उस समय स्कूल में 11 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। निजी स्कूलों के शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को जागरूक किया और उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया। आज उस स्कूल में 32 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अपनी जेब से पैसा खर्च कर बच्चों की दी आधुनिक शिक्षा
बलद्वाड़ा तहसील के बतेल गांव से संबंध रखने वाले नरेश कुमार ने बच्चों में गुणात्मक शिक्षा की अलख जगाने के लिए दिन रात मेहनत की। उनका कहना है कि कई बच्चों को राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं तक पहुंचाया है।
स्कूलों में गणित प्रयोगशाला में प्रयोगात्मक कार्यों के लिए अपनी जेब से पैसा लगाकर गणित को आसानी से समझने के उपकरण स्थापित किए। इससे विद्यार्थियों के लिए गणित समझना आसान हुआ। नरेश सराज के समुनीधार के माध्यमिक पाठशाला में तैनात हैं।
शुरूआती तौर पर बच्चों की सुविधा के लिए उन्होंने अपने पैसों से कंप्यूटर लगवाकर उन्हें आधुनिक शिक्षा निशुल्क प्रदान की। शिक्षक अवार्ड मिलने की सूचना उन तक अमर उजाला ने ही पहुंचाई। नरेश ने कहा कि इस पुरस्कार से वह गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
क्रियाकलाप आधारित पद्धति को दिया बढ़ावा
कमांद में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में तैनात टीजीटी नेत्र सिंह निहरी तहसील के कलाऊं गांव से तालुक रखते हैं। खुद की बच्ची को भी सरकारी स्कूल में शिक्षा दिलवा रहे नेत्र सिंह का कहना है कि बच्चों में बाल केंद्रित शिक्षा व क्रिया कलाप आधारित पद्धति को उन्होंने हमेशा बढ़ावा दिया है।
बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास का प्रयास, शिक्षा के साथ खेलकूद, सांस्कृतिक और भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। बच्चों को योग और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से भी बेहतर और प्रशिक्षित स्टाफ है, लेकिन जरूरत है तो बस अपनी जिम्मेवारी समझने की और शिक्षा की गुणवत्ता पर काम करने की।
स्कूल में सुविधाएं जुटाने में माहिर सत्यपाल
राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान प्राप्त करने वाले जिला सिरमौर की पच्छाद तहसील के सरसू सरहोज निवासी कामर्स प्रवक्ता सत्यपाल सिंह बच्चों को पढ़ाने के साथ स्कूल में बेहतर सुविधाएं जुटाने में माहिर हैं। साधारण परिवार में जन्मे सत्यपाल सिंह की प्राथमिक शिक्षा सरसू स्कूल में हुई।
एक साधारण कृषक परिवार से संबंध रखने वाले सत्यपाल सिंह ने दसवीं कक्षा नारग स्कूल से पास की। बीएससी सोलन कॉलेज से की। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत करके बीएड पटियाला से की और शिक्षा विभाग में टीजीटी नॉन मेडिकल पद पर वर्ष 1990 में सेवाएं शुरू कीं।
उनकी प्रथम नियुक्ति उच्च विद्यालय नौहराधार में हुई। वर्ष 2007 में वह प्रवक्ता कॉमर्स बने और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शरगांव में तैनात हुए। वह वर्तमान में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शाडिया में कार्यरत हैं।
उन्होंने वर्ष 2003 से 2007 तक सराहां शिक्षा खंड में बतौर बीआरसी भी कार्य किया। उस दौरान खंड ने विभागीय कार्यों में अव्वल स्थान हासिल किया था। स्थानीय लोगों की सहभागिता से जहां भी कार्यरत रहे, शिक्षण संस्थानों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया।
ओच्छघाट स्कूल में एक निजी कंपनी के माध्यम से करीब ढाई लाख रुपये खर्च करके कई कार्य किए। उन्होंने कई वर्षों से शतप्रतिशत परीक्षा परिणाम दिए हैं।
नारायण ने अपने खर्च से लगाए एलईडी-कंप्यूटर
पच्छाद क्षेत्र के लाना-मियूटा स्कूल में कार्यरत जेबीटी शिक्षक नारायण दत्त शर्मा को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान दिया जा रहा है। पिछले पांच सालों से वह इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। नारायण दत्त शर्मा ने दसवीं यशवंत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बागथन से की है।
उसके बाद बारहवीं की शिक्षा बेचड़ का बाग से पास की। उसके बाद बीए राजकीय महाविद्यालय नाहन से करने के बाद शारीरिक शिक्षक का कोर्स नागपुर से किया। 2002 में नारायण दत्त शर्मा लाना मियूटा स्कूल में अध्यापक के पद पर तैनात हुए।
उसके बाद दो साल तक वह शिलाई खंड के लानी बगड़ स्कूल में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। नारायण दत्त शर्मा को दसवीं की शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रतिदिन 20 किलोमीटर पैदल आना-जाना पड़ता था।
परिवार कृषक होने के कारण शिक्षा के साथ-साथ नारायण दत्त ने घर में कृषि कर पिता का भी खूब सहयोग किया। नारायण दत्त ने लाना मियूटा प्राथमिक पाठशाला में बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिले, इसके लिए अपने पैसों से एलईडी और कंप्यूटर लगाए।
स्वच्छ जल को लेकर उन्होंने स्कूल को वाटर कूलर भी दिया। स्कूल के बच्चों को बैठने के लिए डेस्क और मैट की भी उन्होंने व्यवस्था की। इसके अलावा स्कूल में ही वर्मी कंपोस्ट पिट भी लगाई गई है।
अनोगा स्कूल के शिक्षक युद्धवीर को मिलेगा राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड
जिले के सरकारी स्कूल अनोगा में तैनात अध्यापक युद्धवीर टंडन को पांच सितंबर को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इस सूची में जिले से वह एकमात्र अध्यापक है, जिन्हें इस बार राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
वर्तमान में युद्धवीर टंडन नवोदय क्रांति परिवार भारत के नेशनल मोटिवेटर और हिमाचल राज्य संयोजक होने के साथ साथ पंजाब राज्य के प्रभारी के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।
शिक्षक युद्धवीर टंडन को यह पुरस्कार पाठशाला में नन्हें उस्ताद बाल समाचार पत्रिका के प्रकाशन, बाल संसद और बाल मंत्रिमंडल की स्थापना, ईमानदारी की दुकान, बाल बचत बैंक, बाल स्वच्छता कमेटी, स्वच्छ आओ इनाम पाओ योजना और प्रश्न पेटी जैसे नवाचारों के लिए दिया जाएगा।
पाठशाला में युद्धवीर हर बाल सभा थीम आधारित आयोजित करवाते हैं। इसके अलावा खेल-खेल में गतिविधि आधारित शिक्षण करवाया जाता है। बच्चे तीन भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में प्रातकालीन सभा का आयोजना करते हैं।
अध्यापक युद्धवीर टंडन ने अपने स्तर पर स्मार्ट क्लास आधारित शिक्षण तीन साल से पाठशाला में शुरू कर रखा है। अमर उजाला से बात करते हुए युद्धवीर टंडन ने बताया कि यह उनके गुरुओं का आशीर्वाद है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में बेहतर व्यवस्था करने के लिए प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
आशा राम को उनके बेहतर कार्य के लिए सरकार करेगी सम्मानित
प्राथमिक पाठशाला नंद में कार्यरत शिक्षक आशा राम को शिक्षक दिवस के मौके पर सरकार की ओर से सम्मानित किया जा रहा है। उनको यह पुरस्कार उनके बेहतर कार्य के लिए दिया जा रहा है। आशा राम अपने को इस पुरस्कार के लिए चुने जाने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। आशा राम ने अपने स्तर पर पाठशाला में बच्चों को पढ़ाई के लिए एलईडी की व्यवस्था के साथ ही बच्चों को साफ-सुथरे पीने के पानी की उचित व्यवस्था, धुआं रहित रसोई घर, बच्चों को मिड -डे मील के दोपहर भोजन की उचित व्यवस्था, सामुदायिक सहभागिता के लिए तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन की भूमिगत कूड़ेदान, पाठशाला में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों के घर-घर जाना, चारदीवारी और फुलवारी की उचित व्यवस्था की है।
आशा राम ने वर्ष 2002 में जब पाठशाला में नियुक्ति दी थी तो उसी दिन पाठशाला को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने की मन में ठान ली थी। उपमंडल के ज्योरा गांव के आशा राम का जन्म 7 दिसंबर 1972 को हुआ है। आशा राम के अनुसार आदर्श पाठशाला के लिए जो सुविधाएं उपलब्ध होती हैं सभी सुविधाएं मुहैया कराई गईं हैं। उन्होंने अपने स्तर पर पाठशाला में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी की। वर्ष 2016 से वर्ष 2019 तक पाठशाला को राष्ट्रीय स्तर के स्वच्छ विद्यालय योजना के तहत प्रथम और तृतीय पुरस्कार पूरे देश में हासिल किए। पाठशाला में प्रगति के कार्य निरंतर है।
स्कूल प्रवक्ता यजनीश को मिलेगा अवार्ड
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जंदडू के जीव विज्ञान प्रवक्ता यजनीश कुमार का चयन राज्य स्तरीय अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है। वह उपमंडल नादौन के गांव मण डाकरघर जलाड़ी जिला हमीरपुर के रहने वाले हैं।
यजनीश ने वर्ष 2001 में बतौर विज्ञान अध्यापक स्कूल में ज्वाइन किया था। जबकि वर्ष 2008 में स्कूल प्रवक्ता के पद पर पदोन्नत हुए। वर्ष 2013 में चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस प्रतियोगिता में उनके द्वारा लैंटीना घास को खत्म कर चारकोल बनाने का प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम रहा था।
इसके लिए स्कूल की छात्रा रंजना देवी और गाइड एवं प्रवक्ता यजनीश कुमार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया था। साथ ही हिमाचल सरकार ने भी उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट किया था।
इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च में बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें वर्ष 2015 में फेलोशिप मिली थी। स्कूल प्रवक्ता यजनीश के सेवाकाल के दौरान पिछले सात सालों से स्कूल का परीक्षा परिणाम सौ फीसदी रहा है।
समर्पण व सहभागिता सफलता की कुंजी : सितेंद्र
अपने कार्य के प्रति समर्पण, सहयोगी शिक्षकों, समाज और विद्यार्थियों की सहभागिता किसी भी अध्यापक की सफलता का मूल मंत्र है। यह कहना है राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले जिला ऊना के नारी प्राथमिक पाठशाला के अध्यापक सितेंद्र कुमार मिन्हास का। उन्होंने इस पुरस्कार को सभी के सामूहिक प्रयास का नतीजा बताते हुए इसका श्रेय समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि 18 अप्रैल 1992 को राजकीय प्राथमिक पाठशाला धमांधरी में बतौर नियमित शिक्षक ज्वाइनिंग के बाद से उनका हमेशा प्रयास रहा कि अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उनके तथा समाज के सहयोग से विद्यालय में आदर्श माहौल बनाया जाए और वहां पढने वाले बच्चों को उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप अधिकतम लाभ मिले। बच्चों को शिक्षण में रुचि हो इसके लिए उनके साथ एक स्नेहपूर्ण बर्ताव भी इसकी एक कुंजी है।
निजी स्कूलों के 26 बच्चे सरकारी में ले आए नंद किशोर शास्त्री
बच्चों की घटती संख्या से जूझ रहे सरकारी स्कूल रूद्रा का बीड़ा संभालते ही नंद किशोर शास्त्री ने संख्या बढ़ाने का प्रण लिया और गांव-गांव जाकर शिक्षा की अलख जगाते रहे। बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित किया। उन्हें सरकारी स्कूल और यहां कार्यरत अध्यापकों की मूल शिक्षा की जानकारी दी।
करीब दो साल तक लगातार मेहनत करते रहने के बाद रूद्रा स्कूल में बच्चों की संख्या 26 से बढ़कर 42 तक पहुंचा पाए। शिक्षा सम्मान के लिए नामित कुनिहार के नंद किशोर शास्त्री का कहना है कि करीब 26 बच्चों ने उनके स्कूल में रहते छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा में निजी स्कूल छोड़कर दाखिला लिया। उन्होंने बच्चों को पौधरोपण और पर्यावरण प्रेम की अलख भी हमेशा जगाए रखी। उन्होंने बताया कि उनकी इसी मेहनत के लिए सरकार ने अध्यापक सम्मान के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया है।