देव-मानस मिलन के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। राज परिवार की दादी कही जाने वाली मां हिडिंबा, बिजली महादेव के आगमन और माता भेखली का इशारा मिलते ही शुक्रवार शाम 4.30 बजे घाटी के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा शुरू हुई।
रथ मैदान से लेकर ढालपुर तक हजारों लोग और देसी-विदेशी सैलानी इस महोत्सव के साक्षी बने। 60 से अधिक देवी-देवताओं की उपस्थिति में सैकड़ों ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों, शहनाई की स्वरलहरियों के साथ जय श्रीराम के उद्घोष के बीच सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ भगवान रघुनाथ का रथ खींचकर पुण्य कमाया।
रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और राज परिवार परिवार के अन्य सदस्यों ने रथ की अगवानी की। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी रथयात्रा में शिरकत की। इसके बाद महोत्सव में शिरकत करने आए घाटी के करीब 225 देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए।
पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा भीड़ रही। तिल धरने की जगह नहीं थी। पूरा शहर जाम रहा। सात दिन तक देव कारज चलेंगे और लोग देवताओं का आशीर्वाद लेंगे। 25 अक्तूबर को सभी देवी-देवता अपने मूल स्थान की ओर लौट जाएंगे।
भगवान रघुनाथ की दायीं ओर चलने के धुर विवाद को लेकर बंजार घाटी के देवता शृंगा ऋषि और बालूनाग पुलिस पहरे में रहे। दोनों देवता रथयात्रा में शामिल नहीं हुए। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देवता विवाद के चलते रथयात्रा में शामिल नहीं हो रहे हैं। दोनों देवता बिना निमंत्रण दशहरा उत्सव में पहुंचे हैं।