पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि पर झूमते देवलु देवरथों के साथ रथ मैदान में पहुंचे। चांदी व सोने के रथों पर विराजमान सैकड़ों देवी-देवता रथ के इर्द-गिर्द एकत्रित होते रहे। राज वेशभूषा में राजपरिवार के लोग भी पहुंच गए। वहीं, रथ पर सवार भगवान रघुनाथ और जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के शुभारंभ मौके पर निकाली गई रथ यात्रा के दौरान रथ मैदान में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।
रथ यात्रा के साथ कुल्लू में देवी-देवताओं के महाकुंभ का आगाज हुआ। भगवान रघुनाथ का रथ खींचने के लिए एकाएक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देश-विदेश से सैलानी इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए मौजूद रहे। उत्सव में करीब 250 देवी-देवता पहुंचे हैं। इनकी मौजूदगी से माहौल देवमयी हो गया।
सुबह से ही हजारों श्रद्धालु भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा का इंतजार करते रहे। दोपहर दो बजे तक रथ मैदान में हजारों लोग एकत्रित हो गए। सभी परंपराओं का निर्वहन करते हुए करीब चार बजे भगवान रघुनाथ पालकी में सवार होकर रथ मैदान पहुंचे। इस बीच जगह-जगह उन पर फूल बरसाए गए। उनका देवी-देवताओं से मिलन हुआ। भगवान रघुनाथ के रथ मैदान में पहुंचते ही मैदान जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा।
इसके बाद भगवान रघुनाथ को पालकी से उतारकर रथ में बैठाया गया। राज परिवार की दादी कही जाने वाली देवी हिडिंबा करीब सवा चार बजे मैदान में पहुंचीं। देवी के पहुंचते ही रथ के सभी पर्दे हटा दिए गए। बाद में जय श्री राम के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने रथ खींचना शुरू किया। रथ को अस्थायी शिविर तक पहुंचाया गया।
देवता धूमल नाग ने भीड़ को किया नियंत्रित- देवता धूमल नाग ने रथ मैदान में भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस की भूमिका अदा की। देवता धूमल नाग ने देव परंपराओं का निर्वहन करने के लिए तय स्थान से आगे आए लोगों को हटाया और देव कारज के लिए जगह बनाई। देवता को आता देख श्रद्धालु भी शीश नवाकर पीछे हट गए।