हिमाचल: हिमुडा में वरिष्ठता विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, सीईओ पद की नियुक्ति रद्द; दो हफ्ते में पात्र अधिकारी चुनें
HIMUDA CEO Dispute: हिमुडा के सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को नियमों के विपरीत मानते हुए अधिसूचना रद्द कर दी। अदालत ने दो सप्ताह में पात्र अधिकारियों पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारी अंजोरी कपूर को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमुडा में नियमों को दरकिनार कर दी गई पदोन्नति और नियुक्ति पर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने हिमुडा के सर्वोच्च पद सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-सचिव) पद से सम्बंधी 27 मई 2025 की अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए नियुक्ति को गैर-कानूनी ठहराकर रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और हिमुडा को निर्देश दिया है कि वे आर एंड पी नियम, 2012 के भर्ती नियमों के मुताबिक सीईओ कम सेक्रेटरी के पद पर दो सप्ताह के भीतर केवल पात्र अधिकारियों के मामलों पर विचार किया जाए और याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर को भी विचार में शामिल किया जाए।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार की ओर से इस पद पर रहते हुए अब तक प्राप्त किए गए वित्तीय लाभों को उनसे वापस न लेने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने जूनियर एवं अपात्र अधिकारी को सीईओ बना दिया था और वरिष्ठ अंजोरी कपूर के लिए एडवाइजर की नई पोस्ट क्रिएट की थी। अंजोरी कपूर ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा कि मुख्य अभियंता का कैडर केवल एक ही नियमित पद का है। किसी अधिकारी के पद को व्यक्तिगत उपाय के रूप में अपग्रेड करने से नया नियमित पद सृजित नहीं होता। अदालत में सरकार को बड़ा झटका देते हुए कहा कि प्रतिवादी की पदोन्नति को नियमित कैडर पद के समकक्ष नहीं माना जा सकता।
अधिकारी-सह-सचिव के पद के लिए निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2012 के तहत शर्तों को पूरा नहीं करते थे। अतः उनकी नियुक्ति अवैध और नियमों के विपरीत है।प्रशासनिक पुनर्गठन का प्रस्ताव एक ही दिन में बदलकर इस प्रकार तैयार किया गया जिससे कनिष्ठ अधिकारी को अनुचित लाभ मिले और वरिष्ठ अधिकारी को उनके अधिकार से वंचित किया जा सके।