हिमाचल प्रदेश: महंगाई की आग में झुलसी रसोई; आटा, तेल, दूध के दामों में उछाल, 65 रुपये तक महंगा हुआ घी
हिमाचल प्रदेश में सरसों तेल का दाम 175 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 190 रुपये पहुंच गया है। चावल की कीमतें फरवरी में 65 से 70 रुपये प्रतिकिलो थीं, जो अब 70 से 75 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गई हैं। महंगाई लगातार इतनी बढ़ रही है कि आम आदमी को गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा है। जानें इसकी वजह...
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हिमाचल में तीन माह के भीतर रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दामों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में आई इस तेजी को पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर यह असर मुख्य रूप से फरवरी से शुरू हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का पहला असर मालभाड़े (परिवहन लागत) में बढ़ोतरी के रूप में सामने आया। आपूर्ति बाधित होने के बाद से ही जमीनी स्तर पर रोजमर्रा की चीजों के रेट तेजी से चढ़ने लगे हैं।
फरवरी 2026 और मई 2026 के बीच खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बड़ा अंतर आया है। सरसों तेल का दाम 175 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 190 रुपये पहुंच गया है। यानी इसमें 15 रुपये प्रति लीटर की तेजी आई है। वहीं, रिफाइंड तेल फरवरी में 165 रुपये प्रति लीटर था, जो अब 5 रुपये बढ़कर 170 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
इस संकट के बीच खाद्य तेल कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं के साथ खेल करने का मामला भी सामने आया है, जहां अधिकतर कंपनियों ने एक लीटर के पैकेट का वजन घटाकर 700 से 750 ग्राम कर दिया है। चावल की कीमतें फरवरी में 65 से 70 रुपये प्रतिकिलो थीं, जो अब 70 से 75 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गई हैं। बाजार में आटे की कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी देखी गई है।
डेयरी और बेकरी उत्पादों पर भी इस संकट का सीधा असर पड़ा है। बीते तीन महीनों के भीतर हिम घी के दामों में करीब 65 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। फरवरी में 660 रुपये प्रति किलो बिकने वाला हिम घी मई में 725 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा वेरका दूध का दाम 66 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 68 रुपये प्रति किलो (2 रुपये की बढ़ोतरी) और ब्राउन ब्रेड का रेट 5 रुपये बढ़कर 55 रुपये से 60 रुपये हो गया है।