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हिमाचल: हाईकोर्ट ने HPU को दिया आदेश, प्रोजेक्ट अफसरों, रिसर्च एसोसिएट को असिस्टेंट प्रोफेसर का दर्जा दें
Thu, 08 Jan 2026 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 08 Jan 2026 05:00 AM IST
सार
डिपार्टमेंट ऑफ इंटर डिसिप्लिनरी स्टडीज में कार्यरत प्रोजेक्ट अधिकारियों और रिसर्च एसोसिएट को असिस्टेंट प्रोफेसर का दर्जा देने का आदेश हिमाचल हाईकोर्ट ने एचपीयू को दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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कोर्ट का आदेश
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचपीयू को आदेश दिया है कि वह डिपार्टमेंट ऑफ इंटर डिसिप्लिनरी स्टडीज में कार्यरत प्रोजेक्ट अधिकारियों और रिसर्च एसोसिएट को असिस्टेंट प्रोफेसर का दर्जा दें। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने पांच दिसंबर 2025 को एकेडमिक काउंसिल की ओर से इस मांग को खारिज करने के फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं के पदनाम को उनके संबंधित ग्रेड-पे के अनुसार सहायक प्रोफेसर के रूप में बदलने की अधिसूचना जारी की जाए और उन्हें वेतन बकाया, वरिष्ठता और अन्य सभी लाभ दिए जाएं। यह पूरी प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।
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अदालत ने पाया कि विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 2(15) के तहत याचिकाकर्ताओं को पहले ही शिक्षक के रूप में अधिसूचित किया जा चुका है। याचिकाकर्ता 2013 से विभिन्न डिग्री कोर्स जैसे रूरल डेवलपमेंट, एनवायरनमेंट साइंस में पढ़ा रहे हैं। उनके पास असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए आवश्यक सभी यूजीसी योग्यताएं मौजूद हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि विश्वविद्यालय ने पहले कई विभागों में गैर-शिक्षण स्टाफ का पदनाम बदलकर असिस्टेंट प्रोफेसर किया है, तो इन याचिकाकर्ताओं के साथ भेदभाव क्यों किया गया है। यूजीसी ने खुद आईआईएचएस के स्टाफ को नियमित करने और उनके पदनाम को शिक्षण स्टाफ के समान करने की सिफारिश की थी।
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अदालत ने विश्वविद्यालय की कार्यसमिति की बैठक में हुई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि जब मामला पदनाम बदलने के लिए रखा गया, तो ऑन स्पॉट आइटम के साथ छेड़छाड़ की गई, जिसे लेकर समिति के सदस्यों ने भी आपत्ति जताई थी।
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