नगर निगम एक्ट लागू होने से पहले बने भवन मालिकों को बड़ी राहत
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प्रदेश सरकार ने नगर एवं ग्राम अधिनियम-1977 और नगर पालिका, नगर निगम अधिनियम-1994 लागू होने से पहले भवनों का निर्माण करने वालों को प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। इन लोगों को अब अपने भवन नियमित कराने के लिए फीस नहीं देनी पड़ेगी। साधारण कागज में आवेदन कर इनके भवनों को नियमित कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह भवन मालिक पहले टीसीपी या नगर निगम में शामिल नहीं थे।
बाद में इन लोगों को मर्ज किया गया है। ऐसे में इन लोगों पर यह एक्ट लागू नहीं किया जा सकता है। टीसीपी ने आवेदन करने के लिए नया खाका तैयार कर दिया है। इसमें क्षेत्र का नाम, कब जमीन ली और कब मकान बना है, इसका ब्योरा मांगा गया है। इसके बाद
टीसीपी रिकार्ड की जांच कर पता करेगा कि क्या वास्तव में यह एरिया टीसीपी के बाहर था या नहीं। इसमें भवन मालिकों की रजिस्ट्री, बिजली और पानी के बिल की भी जांच पड़ताल होगी। टीसीपी संशोधित विधेयक की अधिसूचना जारी होने के बाद कार्यालय में लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है। लोग अपने क्षेत्र की जानकारी लेने में जुटे हैं।
अन्य लोगों को भवन नियमित कराने की यह रहेगी फीस
अन्य भवन मालिकों से भवन नियमित कराने के लिए प्रति वर्ग मीटर 400 से 1200 रुपये लिए जाएंगे। नगर निगम और निकायों के दायरे में 800 रुपये, टीसीपी में 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर फीस ली जाएगी। नगर निगम और निकायों में जिन लोगों ने नक्शे से बाहर
अवैध निर्माण किया है, उनसे 1200 रुपये और टीसीपी के दायरे में 600 रुपये प्रति वर्ग मीटर फीस ली जाएगी। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने बताया कि जिन क्षेत्रों में भवन टीसीपी और नगर निगम में शामिल होने से पहले के बने हैं, उन्हें फीस देने की कोई जरूरत नहीं है। इन भवनों को जैसा है वैसे ही नियमित किया जाएगा।