वर्कचार्ज स्टेटस मामले में ट्रिब्यूनल के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर
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वर्कचार्ज स्टेटस वाली सेवा को पेंशन के लिए आंकने वाले ट्रिब्यूनल के फैसले पर हाईकोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। राज्य सरकार द्वारा ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को नामंजूर करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
प्रशासनिक प्राधिकरण ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसके तहत वन विभाग में कार्यरत कर्मी को दिए गए वर्कचार्ज स्टेटस वाली सेवाओं को पेंशन के लिए आंकने से मना कर दिया था।
शासनिक सदस्य (न्यायिक) डीके शर्मा ने मतवार सिंह द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय पारित किया था। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी वर्ष 1992 से वन विभाग में बतौर चौकीदार कार्य कर रहा था।
उन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित मूलराज उपाध्याय की जजमेंट लाभ देते हुए 1 जनवरी 2002 से वर्कचार्ज स्टेटस दे दिया गया था। सेवानिवृत्ति के पश्चात यह कहकर पेंशन देने से मना कर दिया कि उनकी वर्कचार्ज स्टेटस वाली सेवा को पेंशन के लिए नही आंका जा सकता।
यहां जानिए पूरा मामला
प्रतिवादियों का यह भी तर्क था कि वन विभाग में लोक निर्माण विभाग व सिंचाई एवं जन कल्याण विभाग की तरह वर्कचार्ज स्टेटस नहीं दिया जा सकता। वन विभाग ने खुद ही हाईकोर्ट द्वारा विभिन्न मामलों में पारित निर्णयों की अनुपालना में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मूलराज उपाध्याय के मामले में पारित निर्णय का लाभ देते हुए वर्कचार्ज स्टेटस दिए जाने के आदेश पारित कर रखे हैं, प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने राज्य सरकार द्वारा पारित आदेशों को कानून के विपरीत पाते हुए रदद् कर दिया था। हाईकोर्ट के निर्णय के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि प्रार्थी द्वारा दी गई वर्कचार्ज स्टेटस वाली सेवाओं को पेंशन के लिए आंका जाएगा। प्रशासनिक प्राधिकरण ने प्रतिवादियों को यह आदेश दिए थे कि वह 3 माह के भीतर प्रार्थी को पेंशन दें।