{"_id":"6266caea12742a667848168a","slug":"high-court-refuses-to-interfere-on-orders-of-compulsory-retirement-of-police-personnel","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिमला: हाईकोर्ट का पुलिस कर्मी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेशों पर दखल से इनकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिमला: हाईकोर्ट का पुलिस कर्मी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेशों पर दखल से इनकार
Mon, 25 Apr 2022 09:57 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 25 Apr 2022 09:57 PM IST
सार
न्यायाधीश तरलोक चौहान ने प्रार्थी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह माना जा सकता है कि अनुशासित बल के एक सदस्य याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद उसने सुधार की कोई संभावना नहीं दिखाई।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बिना किसी ठोस कारण के अनुपस्थित रहे पुलिस कर्मी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति वाले आदेशों में फेरबदल करने से इनकार कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक चौहान ने प्रार्थी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह माना जा सकता है कि अनुशासित बल के एक सदस्य याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद उसने सुधार की कोई संभावना नहीं दिखाई।
विज्ञापन
अनुशासनात्मक प्राधिकारी याचिकाकर्ता की जांच रिपोर्ट को देखने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि वह जानबूझकर नौ मार्च, 2019 से अपने कर्तव्यों में शामिल होने में विफ ल रहा था। बिना किसी उचित कारण के 599 दिनों से अधिक समय तक लगातार अनुपस्थित रहा, जो अनुशासित बल के सदस्य का हिस्सा होने के कारण गंभीर कदाचार के रूप में था। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति आदतन थी।
विज्ञापन