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Shimla News: एक एक्सरे मशीन के सहारे जोनल अस्पताल, आपातस्थिति में नहीं मिलती सुविधा
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रोजाना एक्सरे कक्ष के बाहर लगती हैं लंबी कतारें, मरीज परेशान
भीड़ अधिक होने से मरीज निजी क्लीनिकों में करवा रहे एक्सरे
राजधानी के अस्पताल में तीन में से दो एक्सरे मशीनें खराब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल एक एक्सरे मशीन के सहारे है। हालात यह है कि आपातस्थिति में मरीजों को एक्सरे की सुविधा ही नहीं मिल पाती है। वहीं, अगर 4:00 बजे के बाद अगर कोई मरीज चिकित्सकीय जांच करवाता है और उसे एक्सरे लिखा जाए तो अस्पताल में उसे भटकना पड़ता है।
मरीज को मजबूरी में निजी क्लीनिकों के धक्के खाने पड़ते हैं। इससे मरीजों की जेब का खर्च भी बढ़ जाता है। इसी प्रकार की हालत भीड़ अधिक होने के बाद भी होती है। अस्पताल में एक ही मशीन होने के कारण मरीजों को एक्सरे करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। रोजाना आपातस्थिति के अलावा 1200-1500 की ओपीडी रहती है। अस्पताल में मेडिसिन, हड्डी रोग समेत अन्य विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे में मरीजों की हालत को देखते हुए एक्सरे लिखे जाते हैं।
इन दिनों अस्पताल वायरल के मामले भी बढ़े हैं। चेस्ट कंजेशन के मामलों के एक्सरे करवाना जरूरी होता है। इस कारण एक्सरे कक्ष के बाहर कतारें लग रही हैं। राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल में तीन एक्सरे मशीनें हैं लेकिन इसमें से दो खराब पड़ी हुई हैं। इसे ठीक करवाने और बदलने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखा है लेकिन अभी तक एक्सरे की मांग केवल कागजों तक ही सीमित है। अस्पताल में मुफ्त में होने वाले एक्सरे के बाहरी लैब में 500 से 800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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कोट...
अस्पताल में रोजाना मरीजों को एक्सरे की सुविधा दी जा रही है। उच्चाधिकारियों को खराब एक्सरे मशीन के बारे में जानकारी दी गई है। उम्मीद है कि जल्द नई एक्सरे मशीनें अस्पताल में आएंगी। इसके बाद मरीजों को परेशानी नहीं होगी। -लोकेंद्र शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक डीडीयू जोनल अस्पताल शिमला
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भीड़ अधिक होने से मरीज निजी क्लीनिकों में करवा रहे एक्सरे
राजधानी के अस्पताल में तीन में से दो एक्सरे मशीनें खराब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल एक एक्सरे मशीन के सहारे है। हालात यह है कि आपातस्थिति में मरीजों को एक्सरे की सुविधा ही नहीं मिल पाती है। वहीं, अगर 4:00 बजे के बाद अगर कोई मरीज चिकित्सकीय जांच करवाता है और उसे एक्सरे लिखा जाए तो अस्पताल में उसे भटकना पड़ता है।
मरीज को मजबूरी में निजी क्लीनिकों के धक्के खाने पड़ते हैं। इससे मरीजों की जेब का खर्च भी बढ़ जाता है। इसी प्रकार की हालत भीड़ अधिक होने के बाद भी होती है। अस्पताल में एक ही मशीन होने के कारण मरीजों को एक्सरे करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। रोजाना आपातस्थिति के अलावा 1200-1500 की ओपीडी रहती है। अस्पताल में मेडिसिन, हड्डी रोग समेत अन्य विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे में मरीजों की हालत को देखते हुए एक्सरे लिखे जाते हैं।
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इन दिनों अस्पताल वायरल के मामले भी बढ़े हैं। चेस्ट कंजेशन के मामलों के एक्सरे करवाना जरूरी होता है। इस कारण एक्सरे कक्ष के बाहर कतारें लग रही हैं। राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल में तीन एक्सरे मशीनें हैं लेकिन इसमें से दो खराब पड़ी हुई हैं। इसे ठीक करवाने और बदलने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखा है लेकिन अभी तक एक्सरे की मांग केवल कागजों तक ही सीमित है। अस्पताल में मुफ्त में होने वाले एक्सरे के बाहरी लैब में 500 से 800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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अस्पताल में रोजाना मरीजों को एक्सरे की सुविधा दी जा रही है। उच्चाधिकारियों को खराब एक्सरे मशीन के बारे में जानकारी दी गई है। उम्मीद है कि जल्द नई एक्सरे मशीनें अस्पताल में आएंगी। इसके बाद मरीजों को परेशानी नहीं होगी। -लोकेंद्र शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक डीडीयू जोनल अस्पताल शिमला