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हरिद्वार-बनारस की तर्ज पर गोबिंद सागर किनारे बनेंगे घाट, केंद्र की टीम ने किया सर्वे
रितेश गुलेरिया, अमर उजाला, बिलासपुर
Updated Sun, 28 Oct 2018 01:10 PM IST
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हरिद्वार और बनारस की तर्ज पर अब बिलासपुर में भी गोबिंद सागर झील के किनारे घाट बनेंगे। इन घाटों के बनने से जहां क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। इन घाटों को धार्मिक महत्त्व के साथ टूरिस्ट प्वाइंट के तौर पर भी विकसित किया जाएगा।
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योजना को धरातल पर उतारने के लिए हाल ही में दिल्ली से आई एक टीम ने भाखड़ा से सलापड़ तक सर्वेक्षण किया है। टीम इसकी रिपोर्ट केंद्र को देगी। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि घाटों का निर्माण कहां और किस डिजाइन में होगा और कितना खर्च आएगा।
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बिलासपुर में एसी टू डीसी सिद्धार्थ आचार्य ने बताया कि केंद्रीय टीम सर्वेक्षण कर लौट गई है। भाखड़ा बांध निर्माण के दौरान सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए हैं। कई बिलासपुर और गोबिंद सागर के उस पार बसे हैं। अधिकांश लोग आज भी झील को आरपार करने के लिए बोट का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए बोट तक लोगों के पहुंचने के लिए उचित स्थान नहीं है।
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यहां हमेशा हादसों का अंदेशा रहता है। इसी कड़ी में केंद्र की एक टीम ने एसडीएम की अध्यक्षता में भाखड़ा से सलापड़ तक सर्वे किया है। टीम ने सर्वे के दौरान देखा कि कहां-कहां घाट बनाने की आवश्यकता है और घाट का निर्माण कैसे किया जा सकता है। टीम ने इस संबंध में पूरी रिपोर्ट तैयार कर ली है जिसे केंद्र को सौंपा जाएगा।
ऋषिकेश में उतारते हैं बेडे़
गोबिंद सागर के उस पार ऋषिकेश क्षेत्र में पांडवों की बनाई हुई आधी पौड़ी है। यहां मलहार को धर्म भाई बना कर जो भी बेड़ा पानी में उतारता है, उसे वैतरणी पार करने में कष्ट नहीं झेलने पड़ते। यही कारण है कि यहां प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से भी भादो (काला महीना) में लोग बेड़ा छोड़ने आते हैं। घाट बनने से यहां पूजा-अर्चना करने वालों को भी सुविधा मिलेगी।