{"_id":"67f9068a31d3d325000dc08d","slug":"fine-worth-crores-on-sewerage-treatment-plants-not-paid-shimla-news-c-19-1-sml1007-515550-2025-04-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर करोड़ों का जुर्माना, नहीं किया अदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर करोड़ों का जुर्माना, नहीं किया अदा
विज्ञापन
तीन साल में 2.89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा चुका है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्लांटों की हालत में सुधार नहीं
अश्वनी खड्ड की स्थिति होती जा रही है खराब
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इनकी लापरवाही से न केवल नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि तीन सालों में शिमला के अलग-अलग ट्रीटमेंट प्लांटों पर लगभग 2.89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया लेकिन आज तक एक भी जुर्माना राशि अदा नहीं की है। साल 2022 की शुरुआत में लालपानी प्लांट से अशुद्ध जल बहने की शिकायत के बाद 31.8 लाख का जुर्माना लगाया। कुछ महीनों बाद समरहिल प्लांट पर 2.62 लाख रुपये और मल्याणा प्लांट पर 69.5 लाख रुपये का दंड तय किया। मल्याणा प्लांट से बिना साफ किए सीवेज (गंदा पानी) सीधे अश्वनी खड्ड में छोड़ा गया था जिससे पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई थी। 5 अप्रैल को मल्याणा प्लांट पर फिर 59.2 लाख और लालपानी प्लांट पर 95.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। गोलछा प्लांट पर भी 31 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई। इसके बावजूद जुर्माने की रकम जमा नहीं की ।
एनजीटी के आदेशों पर भी अमल नहीं
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 15 दिन के भीतर जुर्माना राशि जमा करने के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अश्वनी खड्ड को प्रदेश की सबसे प्रदूषित खड्ड माना जाता है। यहां लगातार दूषित पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे न केवल जल जीवन पर खतरा बढ़ा है बल्कि स्थानीय आबादी भी प्रभावित हो रही है। लगातार कई सालों से इन प्लांटों से लिए पानी के सैंपल फेल हो रहे हैं। फिर भी न तो कार्यप्रणाली में बदलाव आया और न ही कोई ठोस योजना बनी। ढली, मल्याणा और लालपानी प्लांट से अश्वनी खड्ड में छोड़ा जाता है। अश्विनी खड्ड को लेकर पर एनजीटी में सुनवाई चल रही है। एनजीटी ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण फैलाने वाले वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर रिपोर्ट बनाने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं। आठ हफ्तों में यह रिपोर्ट एनजीटी में पेश करनी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अश्वनी खड्ड की स्थिति होती जा रही है खराब
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इनकी लापरवाही से न केवल नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि तीन सालों में शिमला के अलग-अलग ट्रीटमेंट प्लांटों पर लगभग 2.89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया लेकिन आज तक एक भी जुर्माना राशि अदा नहीं की है। साल 2022 की शुरुआत में लालपानी प्लांट से अशुद्ध जल बहने की शिकायत के बाद 31.8 लाख का जुर्माना लगाया। कुछ महीनों बाद समरहिल प्लांट पर 2.62 लाख रुपये और मल्याणा प्लांट पर 69.5 लाख रुपये का दंड तय किया। मल्याणा प्लांट से बिना साफ किए सीवेज (गंदा पानी) सीधे अश्वनी खड्ड में छोड़ा गया था जिससे पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई थी। 5 अप्रैल को मल्याणा प्लांट पर फिर 59.2 लाख और लालपानी प्लांट पर 95.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। गोलछा प्लांट पर भी 31 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई। इसके बावजूद जुर्माने की रकम जमा नहीं की ।
विज्ञापन
एनजीटी के आदेशों पर भी अमल नहीं
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 15 दिन के भीतर जुर्माना राशि जमा करने के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अश्वनी खड्ड को प्रदेश की सबसे प्रदूषित खड्ड माना जाता है। यहां लगातार दूषित पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे न केवल जल जीवन पर खतरा बढ़ा है बल्कि स्थानीय आबादी भी प्रभावित हो रही है। लगातार कई सालों से इन प्लांटों से लिए पानी के सैंपल फेल हो रहे हैं। फिर भी न तो कार्यप्रणाली में बदलाव आया और न ही कोई ठोस योजना बनी। ढली, मल्याणा और लालपानी प्लांट से अश्वनी खड्ड में छोड़ा जाता है। अश्विनी खड्ड को लेकर पर एनजीटी में सुनवाई चल रही है। एनजीटी ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण फैलाने वाले वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर रिपोर्ट बनाने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं। आठ हफ्तों में यह रिपोर्ट एनजीटी में पेश करनी होगी।
विज्ञापन