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रसूखदारों, दबंगों ने वन भूमि पर कब्जा कर उगाए सेब के बगीचे

Sat, 25 Jul 2015 10:08 AM IST
Updated Sat, 25 Jul 2015 10:08 AM IST
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encroachment on forest land by politician and govt officers.

हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर अतिक्रमण कर सेब बगीचे उगाने वालों का आंकड़ा हजारों में हैं। सबसे ज्यादा कब्जे रोहड़ू, जुब्बल, चौपाल और अपर शिमला में हुए हैं। मंडी, कुल्लू को मिलाकर इनकी संख्या हजारों में पहुंच रही है। कोटखाई में ही 1362 कब्जाधारकों की सूची अमर उजाला के हाथ लगी है। इसमें से अधिकांश लोग प्रभावशाली और राजनीतिक घरानों से जुड़े हैं।

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कब्जाधारकों की सूची में विभिन्न दलों के राजनेता, वन विभाग, राजस्व विभाग के कर्मचारी-अधिकारी, रिटायर अधिकारी और उनके परिजन भी शामिल हैं। इस सूची में दर्जनों ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने सौ बीघा या इससे अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ है। इन पर सेब बागीचे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद वन विभाग ऐसे लोगों पर हाथ डालने से कतरा रहा है। छोटे व मझोले बागवानों के बगीचों पर ही कुल्हाड़ी चल रही है।
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पहली सूची में 550 कब्जे छुड़ाने के आदेश

encroachment on forest land by politician and govt officers.

हाईकोर्ट के आदेश पर रोहडू वन मंडल के अंतर्गत वन विभाग पहली सूची में 550 कब्जों को छुड़ाकर और उनमें उगे सेब पेड़ों को काट रहा है। इस सूची में अधिकतर छोटे बागवान ही हैं। दो सप्ताह से इन्हीं पर कार्रवाई हो रही है। सूची के सैकड़ों कब्जाधारक ऐसे हैं जिनके कब्जे छुड़ाने को अभी कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया है। इसी के चलते विरोध बढ़ रहा है।

हाईकोर्ट के आदेशानुसार कार्रवाई की जा रही है। वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की मुहिम जारी है। निशानदेही पूरी करने के बाद ही विभाग अतिक्रमण हटा रहा है। सभी कब्जों को हटाया जाएगा। इसकी प्रक्रिया जारी है। वन भूमि से सेब बागीचों को काट कर विभाग अपना कब्जा ले रहा है। -चमन लाल, डीएफओ रोहड़ू (शिमला)

बड़े रसूखदारों के कब्जे
हरीराम, गांव जुईला, कोटखाई - कब्जा 165 बीघा
जयलाल, गांव बखोल, कोटखाई - कब्जा 158 बीघा
गोपाल, गांव अधियाला, कोटखाई - कब्जा 23 बीघा

यह है मामला

encroachment on forest land by politician and govt officers.

न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने देवदार के पेड़ों को काटने के पश्चात वन भूमि पर अवैध ढंग से विकसित किए गए बगीचों को काटने के आदेश दिए। खंडपीठ ने अवैध कब्जाधारियों से पेड़ों को काटने पर आए खर्च को वसूलने के आदेश भी दिए थे।

इसी खंडपीठ ने अवैध कब्जों के तहत बनाए गए स्थायी और अस्थायी ढांचों की बिजली व पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने अपने आदेशों की अक्षरश अनुपालना छह महीने के भीतर सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए थे।

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