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बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो जरूर करवाएं ये जांच

Tue, 18 Dec 2018 01:04 PM IST
ashok chauhan ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: ashok chauhan ashok chauhan Updated Tue, 18 Dec 2018 01:04 PM IST
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doctor advice shimla If the child is weak in studies than imigiately get checked

अगर आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर है, वह क्लास वर्क पूरा नहीं करता है। तो एक बार अपने बच्चों की आंखों की जांच जरूर करवाएं। आंखें कमजोर होने के कारण भी बच्चा पढ़ाई में साल दर साल कमजोर होता जाता है।

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छोटी आयु होने के कारण बच्चे आंखों की बीमारी के बारे में परिजनों को नहीं बता पाते हैं और परिजन भी उसे सामान्य रूप से लेते हैं। ऐसे बार-बार आंख रगड़ना बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है और बच्चे को भेंगापन हो सकता है।
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इसलिए बच्चे की आंखों को उपचार समय रहते करना बहुत ही जरूरी है। अगर समय रहते उसे चश्मा लगता है, तो उसकी आंखें अच्छी रहेंगी और भेंगापन होने का खतरा भी खत्म हो जाएगा।
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आंखें कमजोर होने के कारण बच्चा जोर लगाकर ब्लैक बोर्ड पर पढ़ने और क्लास वर्क करने की प्रयास करता है, लेकिन परिजनों को पता नहीं चलता। ऐसा करने से बच्चे की जो ठीक आंख भी होगी, उस पर भी असर पढ़ सकता है।  

आंखों की बीमारी के लक्षण

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अगर छोटी आयु में बच्चा बार-बार आंखे रगड़े रहते हैं। इसके अलावा बच्चे की आंखें स्टाई हो जाती है। जिससे आंखों के पर्दे में रेटिना होने शुरू होता है। ऐसे स्थिति में बच्चे की नजर पर असर पड़ता है और उसकी जो कमजोर आंख है वह टेडी अर्थात भेंगापन होना शुरू हो जाती है।      

इस कारण होती है बीमारी      
बच्चों में आंखों की दिक्कत छोटी आयु में होने का सबसे बड़ा कारण समय के अनुसार सभी प्रकार का टीकाकरण न होना है। जिसके कारण आठ-नौ साल तक के बच्चे में आंखों की बीमारी होने की ज्यादा दिक्कत देखने को मिलती है।

खान-पान में विशेष ध्यान न रखने के कारण भी बच्चे आंखों की बीमारी से ग्रस्त होते है। परिजनों को पढ़ाई में कमजोर हो रहे बच्चे की एक बार आंख की जांच करवनी चाहिए।

 

हो सकता है कि आंखे बच्चे को चश्मे की जरूरत हों, लेकिन वह बता नहीं पा रहा हो। ऐसे स्थिति में बच्चे की बार-बार आंख रगड़े पर जांच करने जरूरी है।  -डॉ शैलेंद्र मन्हास, नेत्र रोग विशेषज्ञ, आई केयर सेंटर धर्मशाला अस्पताल

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