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फोन नहीं उठाने पेयजल कंपनी के दफ्तर में हंगामा
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फोन नहीं उठाने पेयजल कंपनी के दफ्तर में हंगामा
शिमला। शहर के मज्याठ वार्ड में पेयजल सप्लाई और फोन न उठाने पर मंगलवार को कंपनी कार्यालय में कांग्रेस पार्षद तथा एजीएम के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मज्याठ पार्षद दिवाकर देव शर्मा शाम करीब साढ़े पांच बजे एजीएम दफ्तर पहुंचे थे। पार्षद का कहना है कि चार दिन से वह एजीएम को फोन कर रहे हैं लेकिन एजीएम के पास फोन सुनने का वक्त नहीं है। कहा कि उनके वार्ड में कंपनी ने रोजाना 2.70 लाख लीटर पानी जलशक्ति विभाग के टैंक को देने का फैसला लिया था ताकि वार्ड के लोगों को रोज पानी मिल सके। लेकिन कंपनी पूरी सप्लाई नहीं दे रही। कंपनी ने यहां मीटर लगाने को कहा था। विभाग मीटर ले आया तो कंपनी का स्टाफ टालमटोल करने लगा। इसके लिए एजीएम से बात करनी पड़ेगी। एजीएम से संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। चार दिन तक फोन नहीं उठाया तो मंगलवार शाम दफ्तर जाना पड़ा। दफ्तर में पानी न देने और फोन न उठाने का कारण पूछा तो एजीएम भड़क गए और गाली गलौच कर दिया। जनप्रतिनिधि की बात सुनने की बजाय अफसर भड़क गए और दफ्तर से बाहर निकल गए।
पेयजल कंपनी के एजीएम हरमेश भाटिया ने कहा कि जब पार्षद का फोन आया था, तब वह बैठक में थे। बाद में उन्होंने खुद वापस पार्षद को फोन किया। लेकिन पार्षद फोन पर समस्या बताने की बजाय 2014 की कहानी पढ़ने लगे। शाम को पार्षद दफ्तर आए और चिल्लाने लगे। एजीएम ने कहा कि वह समस्या सुनने को तैयार थे, लेकिन ऐसा व्यवहार देखने के बाद दफ्तर से बाहर निकलना पड़ा।
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शिमला। शहर के मज्याठ वार्ड में पेयजल सप्लाई और फोन न उठाने पर मंगलवार को कंपनी कार्यालय में कांग्रेस पार्षद तथा एजीएम के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मज्याठ पार्षद दिवाकर देव शर्मा शाम करीब साढ़े पांच बजे एजीएम दफ्तर पहुंचे थे। पार्षद का कहना है कि चार दिन से वह एजीएम को फोन कर रहे हैं लेकिन एजीएम के पास फोन सुनने का वक्त नहीं है। कहा कि उनके वार्ड में कंपनी ने रोजाना 2.70 लाख लीटर पानी जलशक्ति विभाग के टैंक को देने का फैसला लिया था ताकि वार्ड के लोगों को रोज पानी मिल सके। लेकिन कंपनी पूरी सप्लाई नहीं दे रही। कंपनी ने यहां मीटर लगाने को कहा था। विभाग मीटर ले आया तो कंपनी का स्टाफ टालमटोल करने लगा। इसके लिए एजीएम से बात करनी पड़ेगी। एजीएम से संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। चार दिन तक फोन नहीं उठाया तो मंगलवार शाम दफ्तर जाना पड़ा। दफ्तर में पानी न देने और फोन न उठाने का कारण पूछा तो एजीएम भड़क गए और गाली गलौच कर दिया। जनप्रतिनिधि की बात सुनने की बजाय अफसर भड़क गए और दफ्तर से बाहर निकल गए।
पेयजल कंपनी के एजीएम हरमेश भाटिया ने कहा कि जब पार्षद का फोन आया था, तब वह बैठक में थे। बाद में उन्होंने खुद वापस पार्षद को फोन किया। लेकिन पार्षद फोन पर समस्या बताने की बजाय 2014 की कहानी पढ़ने लगे। शाम को पार्षद दफ्तर आए और चिल्लाने लगे। एजीएम ने कहा कि वह समस्या सुनने को तैयार थे, लेकिन ऐसा व्यवहार देखने के बाद दफ्तर से बाहर निकलना पड़ा।
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