फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Destruction continues in the city even after the rain stopped

Shimla News: बारिश थमने के बाद भी शहर में तबाही का सिलसिला जारी

Wed, 16 Aug 2023 11:30 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Aug 2023 11:30 PM IST
विज्ञापन
Destruction continues in the city even after the rain stopped
कृष्णानगर में दरकी पहाड़ी, स्लाॅटर हाउस समेत छह मकान ढहे, दो की मौत, दहशत में लोग
विज्ञापन

पार्षद ने पहले ही खाली करवा दिए थे मकान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में मूसलाधार बारिश थमने के बाद भी तबाही का सिलसिला जारी है। समरहिल और फागली के बाद शहर में अब कृष्णानगर की पहाड़ी दरक गई। यहां हुए भूस्खलन के कारण नगर निगम के चार मंजिला स्लॉटर हाउस समेत छह मकान जमींदोज हो गए। मलबे में दबने से दो लोगों की मौत भी हो गई है।

स्लॉटर हाउस में तैनात मैनेजर नवीन भल्ला उर्फ सोनू और कर्मचारी राजू मलबे की चपेट में आ गए। इनके शव बरामद कर लिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार दोपहर करीब 12:00 बजे विष्णू मंदिर इलाके में कुछ मकानों में दरारें पड़ने लगी थीं। यहां देवदार के दो बड़े पेड़ भी खतरनाक हो गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद बिट्टू कुमार नगर निगम के अधिकारियों को लेकर मौके पर पहुंचे। खतरे को देखते हुए तुरंत लोगों को मकान खाली करने को कहा गया। लोगों ने भी खतरे को भांपते हुए मकान खाली करना शुरू कर दिए। दोपहर 4:00 बजे दरारें तेजी से बढ़ गईं जिसके चलते सभी लोगों को यहां से हटने के लिए कहा गया। 5:00 बजे के करीब पहाड़ी दरकने से पेड़ों समेत छह मकान नीचे कृष्णानगर नाले में बने नगर निगम के स्लॉटर हाउस पर जा गिरे। इससे स्लॉटर हाउस भी जमींदोज हो गया। मलबे में दबे दोनों कर्मचारी इसी भवन में थे। ययह बाहर निकल पाते, इससे पहले ही यह मलबे में दफन हो गए।
विज्ञापन




देररात तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
मकान ढहने के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए देररात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। देररात मैनेजर नवीन भल्ला का शव बरामद कर लिया गया। दूसरे कर्मचारी का सिर भी मलबे से बरामद हुआ। बुधवार को फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन में इसका धड़ भी बरामद कर लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



2012 में भी दरक गया था कृष्णानगर
शहर के कृष्णानगर में पहले भी इस तरह की तबाही हो चुकी है। साल 2012 में हुए भूस्खलन के कारण 10 से ज्यादा मकान और ढारे ढह गए थे। उस समय भी कई लोग बेघर हुए थे। कृष्णानगर में ज्यादातर मकान कच्चे हैं। नगर निगम के अनुसार यह अवैध हैं। हालांकि इन ढारों में लोग कई सालों से रह रहे हैं। कच्ची जमीन होने के कारण हर साल बरसात में यहां भूस्खलन होता है। नाले पक्के न होने के कारण भारी नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article