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मासूम से दुराचार पर साधु को आजीवन कारावास

Tue, 02 Dec 2014 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊना
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊना Updated Tue, 02 Dec 2014 10:15 PM IST
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Sage on mistreatment of innocent life imprisonment at himachal.

ऊना की विशेष न्यायाधीश सीएल कोछड़ की अदालत ने नौ साल की बच्ची के साथ दुराचार के लिए साधु प्रेम बहादुर, निवासी उत्तराखंड को आजीवन कारावास की सुजा सुनाई है। दोषी को 15 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा भी सुनाई है।

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लोक अभियोजक एनसी घई ने बताया कि दोषी जंगल में कुटिया बनाकर रह रहा था। इसी दौरान मासूम बच्ची को करीब चार साल पहले उसका मुंह बोला पिता छोड़ गया था। बच्ची को स्कूल में दाखिल करवा दिया गया।
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कुछ समय बाद साधु ने बच्ची के साथ दुराचार करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं मारपीट भी शुरू कर दी। जान से मारने की धमकियां भी देने लगा।

दुराचार के बाद की थी मारपीट कपड़े भी जला डाले

Sage on mistreatment of innocent life imprisonment at himachal.

10 अप्रैल 2014 की रात भी उसने बच्ची के साथ दुराचार किया और मारपीट के बाद उसके कपड़े जला डाले। 11 अप्रैल 2014 की सुबह बच्ची ने स्कूल में आपबीती शिक्षकों को सुनाई।

शिक्षकों ने पंचायत प्रधान को सूचित किया और पुलिस को भी सूचना दी। केस दर्ज हुआ और साधु को गिरफ्तार कर लिया गया।

घई ने बताया कि अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास, 10 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना अदा न करने की सूरत में छह माह अतिरिक्त कारावास, आईपीसी की धारा 323 के तहत छह माह सजा, एक हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर एक माह अतिरिक्त कारावास, धारा 506 व 201 के तहत 1-1 साल कारावास, 2-2 हजार जुर्माना, जुर्माना न देने पर 2-2 माह की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।

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