जिंदा व्यक्ति को मरा बताकर दूसरे के नाम कर दी जमीन, ऐसे हुआ खुलासा
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राजस्व विभाग की मिलीभगत से जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर उसकी जमीन का दूसरे व्यक्ति के नाम इंतकाल करने के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। मामला हिमाचल के बिलासपुर जिले का है। इतना ही नहीं, इंतकाल पर तहसीलदार के भी फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जिस तहसीलदार के हस्ताक्षर किए गए हैं, उनका कहना है कि उन्होंने इंतकाल किया ही नहीं। मामले का खुलासा उस वक्त हुआ, जब जमीन का मालिक भूमि की वसीयत अपनी पत्नी के नाम करवाने गया।
बरमाणा क्षेत्र के हरनोड़ा गांव के कालाराम को मरा हुआ साबित कर उनकी जमीन का इंतकाल प्यारेलाल और गुरुद्वारा देवी के नाम कर दिया गया। गुरुद्वारा देवी को कालाराम की विधवा बताया है। राजस्व विभाग ने यह फर्जी इंतकाल 2016 में किया है।
विभाग से मिले दस्तावेजों में ऐसे सामने आया मामला
विभाग से मिले दस्तावेजों और कालाराम के अनुसार यह इंतकाल धौन कोठी पटवार सर्कल के पटवारी सुरेश चोपड़ा के कार्यकाल में हुआ है। इसमें नंबरदार रविंद्र कुमार को गवाह बनाया गया है। वह धार-टटोह से संबंधित हैं।
उसका हरनोड़ा पंचायत की नंबरदारी से कोई लेना-देना तक नहीं हैं। तहसीलदार जीतराम भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने उस इंतकाल को मुकम्मल नहीं किया है। इससे सवाल पैदा होता है कि जीवित आदमी को मरा हुआ बताकर उसकी जमीन किसी और के नाम करने के पीछे किसका हाथ है।
इतना बड़ा फर्जीवाड़ा राजस्व विभाग के अधिकारी की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। कालाराम का कहना है कि उनकी पत्नी सुखदेई के अलावा और कोई ऐसा नहीं है, जो जमीन जायदाद का वारिस है।
कहा कि उन्हें मृत घोषित कर उनकी जमीन का मालिक कोई और बन गया है। पीड़ित ने तहसीलदार जीतराम भारद्वाज को पत्र सौंपा है। इसमें उनकी जमीन वापस उनके नाम करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। तहसीलदार जीतराम भारद्वाज ने कहा कि मामला गंभीर है।
इसकी गहनता से जांच की जाएगी। जांच में जिस तरह की भी रिपोर्ट आएगी, वह प्रशासन को सौंपकर आगामी कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम बिलासपुर डॉ. हरीश गज्जू ने बताया कि मामला ध्यान में है। जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। जो भी दोषी होगा, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।