जब नवजात को मुंह में लेकर मार्केट पहुंचा डॉगी
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लोगों ने बच्ची का शव कुत्ते से छुड़वाया और इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दी। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी। अब तक की जांच में सामने आया है कि इस बच्ची का जन्म सातवें माह में ही हो गया था।
वहीं, ठियोग अस्पताल से बाद विशेषज्ञ जांच के लिए बच्ची के शव को आईजीएमसी शिमला भेज दिया गया है। डीएसपी रतन सिंह नेगी ने खबर की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि तीन साल पहले भी ठियोग अस्पताल के पास इस तरह का मामला सामने आ चुका है।
जांच में जुटी पुलिस, केस दर्ज
जंगल में कौन इस नवजात को फेंक गया है। पुलिस इसकी जांच में जुट गई है। आसपास के क्लीनिकों में भी छापेमारी की जा रही है।
ठियोग अस्पताल के एसएमओ डा. कुलदीप कंवर ने बताया कि नवजात एक लड़की थी जिसका बजन करीब आठ सौ ग्राम है। उन्होंने कहा कि हो सकता है की बच्ची का जन्म सातवें माह में हो गया हो।
डीएसपी ठियोग रतन सिंह भारद्वाज ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस पता लगाने में जुटी है कि बच्ची को किसने जंगल में फेंका है?