भालुओं के पित्त की तस्करी करते चार गिरफ्तार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ये है कीमत
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शिमला जिला के रामपुर में भालुओं के पित्त की तस्करी करते चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। नेशनल हाईवे पांच पर गौरा कैंची के पास पुलिस ने गुरुवार रात को भालुओं के पित्त ले जाते दो नेपाली युवकों समेत चार लोगों को धर दबोचा।
पुलिस ने गश्त के दौरान रात को जा रहे चार लोगों की तलाशी ली तो उनके पास भालुओं के तीन पित्त मिले। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भालू के एक तोला पित्त की कीमत 50 हजार तक है। एक पित्त की कीमत करोड़ों में होती है। पुलिस ने चारों के खिलाफ मामला दर्जकर कोर्ट में पेश किया है।
पुलिस के अनुसार वीरवार रात गश्त के दौरान रामपुर के पास गौरा कैंची में केवल राम (52) शांदल, राजवीर (40), मुनिष बाहली, काली बहादुर रामीडारा (नेपाल) और कृष्ण खत्री (32), संयजा (नेपाल) से तलाशी के दौरान भालू के तीन पित्त बरामद किए।
उक्त लोगों से जब भालू कि पित्त के लाइसेंस और परमिट मांगे तो वे नहीं दे पाए, जिसके चलते पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया। चारों के खिलाफ पुलिस ने भालू के पित्ते की तस्करी करने और खरीदने के आरोप में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है।
चीन में होता है पित्त का मेडिसिन बनाने में इस्तेमाल
पुलिस को सूचना मिली थी कि रामपुर में भालुओं को मारकर उनके पित्त की तस्करी की जा रही है। डीएसपी रामपुर अभिमन्यु वर्मा ने बताया कि पुलिस ने भालुओं के तीन पित्तों के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामला दर्जकर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि पित्त का भारत में कम ही उपयोग होता है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल मेडिसिन बनाने के लिए चीन में होता है। भालू के पित्त का उपयोग गेस्ट्रिक, अल्सर, गठिया, और मधुमेह जैसी बीमारियों के इलाज के अलावा नपुंसकता दूर करने के लिए किया जाता है।